झारखंड: आधार कार्ड ने एक बच्ची की जान ले ली!

रांची:  झारकंड के सिमडेगा से जो खबर आई है उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। यहां 11 साल की एक बच्ची की मौत इसलिए हो गई क्योंकि परिवार का आधार कर्ड राशन कार्ड से लिंक नहीं था। इसलिए राशन दुकानदार ने राशन देने से मना कर दिया। 11 साल की संतोषी रोज स्कूल के मिड डे मील में खाना खाकर आ जाती थी। लेकिन दशहरा की छुट्टी की वजह से स्कूल बंद था। इसलिए मिड डे मील भी नहीं मिला। आखिर में चार दिनों तक भूख से तड़प तड़प कर संतोषी ने दम तोड़ दिया। मरते वक्त उसके मुंह से निकले अंतिम शब्द थे भात भात (उबले हुए चावल)।

संतोषी की मां कोयली देवी दातुन बेचने का काम करती है। हफ्ते के 80 रुपये की कमाई हो जाती है। पति दिमागी तौर पर कमजोर है इसलिए कोई काम नहीं करता। 80 रुपये में परिवार का गुजारा करने वाली कोयली देवी के लिए हफ्ते भर का राशन जुटाना मुश्किल हो गया। क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया था कि अगर राशन कार्ड और आधार कार्ड के नंबरों का मिलन नहीं होगा तो राशन नहीं मिलेगा। सरकार के मिलन वाले इस नियम के सामने एक मां से उसकी बच्ची हमेशा हमेशा के लिए बिछड़ गई।

कोयली देवी ने बताया मैं जब चावल लेने गई तो मुझे राशन नहीं दिया गया। मेरी बेटी भात-भात कहते कहते मर गई। कोयली देवी के मुताबिक 28 सितंबर को उसकी बेटी की मौत हुई। मरने से पहले संतोषी 4 दिनों तक भूखी रही। आधार से राशन कार्ड लिंक नहीं होने की वजह से फरवरी महीने से ही कोयली देवी को राशन नहीं मिल रहा था।

ये घटना सिमडेगा के जलडेगा ब्लॉक की है। वहां के बीडीओ ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि परिवार का आधार कार्ड नहीं होने के कारण सरकार सहायता का फायदा उसे नहीं मिल रहा था। लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि बच्ची की मौत भूख की वजह से हुई है। उनके मुताबिक बच्ची की मौत मलेरिया की वजह से हुई है।

Loading...