अब दिल्ली में भी मोदी का साथ देंगे नीतीश

नई दिल्ली:  बिहार के सीएम पद से इस्तीफा देने और उस इस्तीफे के बाद बीजेपी से हाथ मिलाकर अगले दिन फिर सीएम बनने की कहानी सभी ने पढ़ी। नीतीश को इस बदलाव के साथ सीएम बन गए लेकिन उनके इस बदलाव ने नीतीश और शरद यादव के बीच प्रतिस्पर्धा की लकीर खींच दी। अब सवाल ये किये जा रहे हैं कि अगर नीतीश और शरद दोनों पार्टी में रहते हैं तो जाहिर है एक नेता के साथ खड़े कार्यकर्ता बागी कहे जाएंगे। लेकिन दुविधा ये है कि दोनों नेता खुद को जेडीयू के असली कर्णधार बता रहे हैं।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार में बीजेपी के साथ की अपनी दोस्ती को शनिवार को और एक कदम आगे बढ़ा दिया। नीतीश की अध्यक्षता में हुई जेडीयू कार्यकारी की बैठक में एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव पास हो गया। यानि अब नीतीश का साथ केवल बिहार तक ही नहीं दिल्ली में भी नीतीश पीएम मोदी के साथ भागीदार हैं। जेडीयू 4 साल बाद एनडीए में दोबरा शामिल हो रही है। हलांकि जो फैसला जेडीयू ने आज लिया बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही उसके बारे में जानकरी दे दी थी। अमित शाह ने कहा था कि मैं नीतीश जी को एनडीए में शामिल होने का न्योता देता हूं।

बिहार की राजधानी पटना की सड़कें इसकी गवाही दे रही हैं कि नीतीश और शरद के बीच पार्टी में किस तरह की जोर आजमाइश चल रही है। शरद यादव अपन पोस्टर से ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि महागठबंधन अभी भी जारी है। दूसरी तरफ नीतीश ये बता रहे हैं कि बीजेपी ही सच्चा साथी है। पिछले दिनों शरद यादव ने जिस तरह से नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है उसके बाद शरद के कद को छोटा करने की कोशिश भी शुरु हो गई है। शरद यादव को राज्य सभा में जेडीयू के नेता के पद से हटा दिया गया। हलांकि जानकार मानते हैं कि शरद यादव को पार्टी में किनारा करना नीतीश के लि आसान नहीं है।

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