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104 उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में भेजने के बाद ISRO ने किया एक और बड़ा कारनामा

104 उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में भेजने के बाद ISRO ने किया एक और बड़ा कारनामा




नई दिल्ली: अंतरिक्ष में एक साथ 104 उपग्रह भेजने के बाद पूरी दुनिया ISRO की तरफ हैरानी के साथ देख रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ISRO की इस कामयाबी के बाद रुस से लेकर अमेरिका तक काफी पीछे हो गए हैं। और तो और चीन ने भी ISRO की इस कामयाबी पर दुनिया को सीखने की सलाह दी थी। लेकिन ये पूर्ण विराम नहीं है। क्योंकि ISRO ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है।

इसबार ISRO ने देश में निर्मात सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया है। इस शक्तिशाली इंजन का परीक्षण तमिलनाडु के तिरनेल्वेल्ली जिले के महेंद्रगिरी में बने ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया। इससे पहले सभी प्रणालियों की पुष्टि करने के लिए सी 25 स्टेज ने 25 जनवरी को 50 सेकेंड के लिए सफल उड़ान भरी थी।

– ISRO ने एक साथ लॉन्च किये 104 सैटेलाइट्स, रूस और अमेरिका काफी पीछे छूट गए

ISRO का यह इंजन जीएसएलवी मार्क थर्ड 400 टन श्रेणी के रॉकेट को अंतरिक्ष में छोड़ने में सक्षम है। यह इंजन जीएसएलवी मार्क द्वितीय की जगह लेगा। इसे 2001 में लॉन्च किया गया था।

मार्क तृतीय के इंजन में ईंधन के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। इस ईंधन को माइनस 253 डिग्री सेंटीग्रेट में रखा जाता है। अमेरिका, रूस, जापान, चीन, फ्रांस के बाद भारत इस इंजन वाले क्लब में शामिल हो गया है।

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