Inside Story: गोड्डा में मोटरसाइकिल पर बच्ची के शव को ले जाने की घटना के पीछे की सच्चाई

गोड्डा/झारखंड:  बुधवार को गोड्डा सदर अस्पताल में शाम के तकरीबन 4 बजकर 30 मिनट पर एक बच्ची को लाया गया। बताया जा रहा है बच्ची की हालत काफी नाजुक थी। अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सीएल बैद्य ने उसकी जांच की। लेकिन बच्ची की मौत हो चुकी थी। मृत बच्ची की उम्र 12-14 वर्ष की बताई जा रही है। जिसके बाद बच्ची को अस्पताल लानेवाले लोग उसके शव को मोटरसाइकिल से   लेकर चले गए। यहीं से विवाद और आरोप की शुरुआत हुई।

दरअसल एक निजी चैनल की तरफ से ये दावा किया गया कि अस्पताल की तरफ से मृत बच्ची के परिजन को शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मुहैया नहीं कराया गया। जिसकी वजह से मजबूरी में शव को मोटरसाइकिल से लेकर जाना पड़ा। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग समेत पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आया। और इसकी जांच पड़ताल शुरु की गई।

क्या सफाई पेश की गई?

निजी चैनल की तरफ जिस लापरवाही की बात की जा रही थी इसपर अस्पताल प्रशासन कि तरफ से अपनी सफाई पेश की गई। जिसमें बताया गया कि मृत बच्ची के परिजनों ने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग नहीं की। अस्पताल की तरफ से ये बात भी कही गई है कि उस वक्त ड्यूटी पर तैनात अस्पताल के कर्मचारियों ने भी उसे रोकने की कोशिश की लेकिन परिजन बच्ची का शव लेकर जल्दबाजी में मोटरसाइकिल से चले गए।

 

स्वास्थ्य विभाग ने क्या कारर्वाई की?

स्वास्थ्य महकमा पर लगे आरोप गंभीर थे इसलिए इसकी जांच जरूरी थी। प्रभारी सिविल सर्जन की तरफ से ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से स्पष्टीकरण की मांग की गई। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा गया।

विभाग की तरफ से क्या कहा गया?

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने अपने जवाब में बताया है कि 6-12-2017 को संध्या 4.20 पर सदर अस्पताल इमरजेंसी में सड़क दुर्घटना में घायल मरीज का इलाज कर रहे थे। तभी कुछ लोग 12-14 साल की बच्ची को लेकर सदर अस्पताल आए। लेकिन जांच करने पर बच्ची मृत पाई गई। इसके बाद बच्ची के परिजनों को बाकी की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए डॉक्टर ने अपने कमरे में बुलाया। लेकिन इसी बीच बच्ची के परिजन शव को लेकर वहां से चले गए। डॉक्टर की तरफ से विभाग को सौंपे गए अपने जवाब में अस्पताल के उस कर्मचारी का भी जिक्र है जिसने उन्हें बच्ची का शव लेकर जाने से रोकने की कोशिश की। लेकिन इससे पहले की कोई कुछ समझ पाता मोटरसाइकिल पर शव लेकर वो जा चुके थे।

सूत्रों के हवाले से ये बात भी सामने आई है कि जो लोग बच्ची के शव को लेकर सदर अस्पताल से गए वो जिला मुख्यालय से कुछ दूर पेलगढ़ी के रहनेवाले थे। सूत्रों के हवाले से ये भी पता चला है कि वो जल्दबाजी में शव को लेकर इसलिए अस्पताल से गए ताकि किसी कानूनी झंझट में ना फंसें। परिजनों की तरफ से ये भी साफ किया गया है कि उन्होंने अस्पताल से एंबुलेंस की मांग की ही नहीं थी।

जानकारी के मुताबिक बच्ची पिछले तकरीबन तीन साल से हार्ट डिजीज से पीड़ित थी और उसकी बीमारी गंभीर थी। उसका इलाज किसी निजी क्लिनिक में चल रहा था।

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