USA में भारतीय IT कंपनियां क्यों हैं चिंतित ?

USA में मौजूद भारतीय IT कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। ये चिंता अमेरिकी सांसदों के उस प्रस्ताव को लेकर है जिसमें एच-1बी वीजा और एल-1 वीजा पर रोक लागने की मांग की गई है। सांसदों के द्विदलीय समूह ने इस प्रस्ताव को प्रतिनिधि सभा में पेश किया है।

इस विधेयक में भारतीय कंपनियों की तरफ से एच-1बी वीजा और एल-1 वीजा पर नियुक्ति देने पर रोक लागने की मांग की गई है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसदों की तरफ से पेश एच-1बी वीजा और एल-1 वीजा सुधार विधेयक यदि पारित होता है तो भारतीय कंपिनयों पर एच-1बी वीजा और एल-1 वीजा पर 50 से ज्यादा कर्मचारी या फिर 50 फीसदी से अधिक के नियुक्ति करने पर रोक लग जाएगी।

भारतीय IT कंपनियों के लिए ये परेशानी वाली बात इसलिए है क्योंकि इस तरह की कंपनियों का रेवेन्यू मॉडल मुख्य तौर पर एच-1 बी और वीजा और एल1 वीजा पर निर्भर करता है। अब अगर इस बिल को पास कर दिया जाता है तो इससे भारतीय आईटी कंपनियों की सेहत पर बुरा असर पड़ना वाजिब है। इस बिल पर राष्ट्रपति बराक ओबामा के दस्तखत से पहले इसे सीनेट से गुजारना होगा। फिलहाल इसे सदन में पेश नहीं किया गया है। इस बिल को पेश करनेवाले दोनों सांसद अलग-अलग राज्यों से हैं। जहां काफी संख्या में भारतीय एच-1बी वीजा पर काम करते हैं।

अमेरिकी सांसद पास्क्रेल ने इस विधेयक के समर्थन में कहा है कि ‘USA बड़े पैमाने पर स्किल्ड और हाईटेक प्रोफेशनल तैयार कर रहा है। इन लोगों के पास अडवांस्ड डिग्रियां हैं, लेकिन नौकरियों के अवसर नहीं। इनसोर्सिंग और विदेशी वर्कर्स के अधिकारों का हनन कर कुछ कंपनियां वीजा प्रोग्राम का फायदा उठा रही हैं। इसके जरिये वो हमारी वर्कफोर्स को महत्व नहीं दे रहीं और अधिक मुनाफा कमा रही हैं।‘

हलांकि अमेरिकी पास्क्रेल और रोहराबेशर ने 2010 में भी इस तरह का बिल पेश किया था। लेकिन अमेरिकी संसद में इस बिल को समर्थन नहीं मिल सका था।
-Indian IT company in US

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