Women condome molestation

दिल्ली में कंडोम की वजह से 33 % शादीशुदा औरतों को पीटा जाता है

दिल्ली में कंडोम की वजह से 33 % शादीशुदा औरतों को पीटा जाता है

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं के प्रताड़ित होने की खबर सामने आती रही है। लेकिन इसबार उनके प्रताड़ित होने की जो वजह सामने आई है वो चौंकाने वाली है। एक रिसर्च में सामने आया है कि सेक्स के दौरान ज्यादातर पुरुष कंडोम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते और ना ही अपनी बीवी को गर्भनिरोधक दवाई का इस्तेमाल करने देना चाहते। पुरुषों की यही जिद पति-पत्नी के बीच मारपीट की वजह बनती है।

इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन में हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट प्रकाशित किया गया है। इसमें नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के मुताबिक 37 फीसदी औरतें अपनी जिंदगी में सेक्शुअल, मानसिक और शारीरिक हिंसा का शिकार होती हैं। सर्वे में ये बात भी सामने आई है कि ऐसा करनेवाले ज्यादातर पुरुषों की महीने की सैलरी 25,000 रुपये से ज्यादा है।

ये सर्वे दिल्ली की 500 औरतों पर किया गया। इसमें अलग अलग तबके की औरतों को शामिल किया गया था। इस सर्वे में कुछ औरतें पढ़ी लिखी नहीं थीं, कुछ ग्रेजुएट थीं तो कुछ डॉक्टरेट। स्टडी मे 46 फीसदी औरतों ने बताया कि उनके पति कंडोम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। जिसकी वजह से कई औरतें बगैर अपनी मर्जी के प्रेग्नेंट हो चुकी हैं। 39 फीसदी औरतों के पति उनका रेप करते हैं। गर्भ निरोधक दवाइयों का इस्तेमाल करने पर वो उनके शरीर में रॉड, सेफ्टी पिन या कोई नुकीली चीजें चुभो देते हैं। 23 फीसदी औरतें रोजाना मारपीट की शिकार होती हैं। 33 फीसदी को केवल कंडोन के इस्तेमाल की वजह से गालियां सुननी पड़ती हैं।
डॉ. नीलांचली सिंह का कहना है कि ‘औरतों को बच्चे पैदा करने का फैसला लेने का हक नहीं है। ज्यादातर जगहों पर अभी भी औरतों को परिवार नियोजन का हक नहीं है। बच्चे पैदा करने का हक या तो पति का होता है या सास का। जो औरतें पुरुषों पर निर्भर हैं पुरुष उन्हें गर्भनिरोधक के लिए पैसे नहीं देते। मानसिक तौर पर टॉर्चर कर देते हैं। गालियां देते हैं। सिगरेट और प्रेस से जलाते हैं। उसके बाद बगैर कंडोम के सेक्स भी करते हैं। इस तरह से औरतें बार-बार प्रेगनेंट होती हैं। बार-बार एबॉर्शन करवाए जाते हैं। जिससे औरत का शरीर बिल्कुल खोखला हो जाता है।‘
स्टडी के मुताबिक 29 फीसदी औरतें पढ़ी-लिखी नहीं थीं। 71 फीसदी औरतें या तो ग्रेजुएट थीं या उससे भी ज्यादा पढ़ी-लिखी थीं। दिल्ली में 37 फीसदी औरतें किसी न किसी तरह की घरेलू हिंसा झेलती हैं। जिनमें से केवल 12 फीसदी ही विरोध करने की हिम्मत जुटा पाती हैं। बड़ी तादाद 88 फीसदी उन औरतों की है जो ये मान चुकी हैं कि उनके नसीब में यही लिखा है।
घरेलू हिंसा के कई मामलों में जब डॉक्टर के पास महिला को इलाज के लिए लाया जाता है तो पाया जाता है कि उनके शरीर पर कई जगह गहरे जख्म हैं। जब इस तरह की महिलाओं का ऑपरेशन किया जाता है तो औरतों के शरीर में लोहे की नुकीली चीजें धंसी मिलती हैं। कई महिलाओं को तो सौच करने में भी काफी तकलीफ होती है। अगर दिल्ली जैसे शहर की ये हकीकत है तो देश के दूसरे इलाकों के बारे में सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हैरानी की बात ये है कि इनमें ज्यादातर तादाद उन पुरुषों की है जिनकी महीने की सैलरी ठीक ठाक (25,000रु.) से अधिक है।

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