इलियास आजमी ने छोड़ा AAP का साथ

इलियास आजमी ने छोड़ा AAP का साथ

आम आदमी पार्टी के एक और पुराने साथी ने AAP का साथ छोड़ दिया। इलियास आजमी पार्टी के पुराने और वरिष्ठ नेता थे। लेकिन पार्टी ने उन्हें पीएसी से बाहर कर दिया था। जिसके बाद इलियास आजमी ने पार्टी ही छोड़ दी। लेकिन पार्टी छोड़ते-छोड़ते इलियास के आरोप भी कुछ उसी तरह के थे जैसे की AAP के पूर्व सहयोगियों ने पार्टी छोड़ने से पहले लगाए थे। ‘इलियास आजमी ने कहा की राजनीतिक दल देश को फासीवाद की तरफ धकेल रहा है। AAP के साथ-साथ उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। लेकिन उनकी असल नाराजगी AAP की नीती से थी। क्योंकि कांग्रेस-बीजेपी से तो वो पहले ही मायूस हो चुके थे जिसके बाद AAP से जुड़े थे। लेकिन यहां भी उनकी वो मनोकामना और उद्देश्य पूरा नहीं हुआ जिसके लिए उन्होंने AAP को अपना बनाया था।‘ इलियास आजमी ने सीधा सीधा आरोप लगाया की नई चुनौती का मुकाबला करने में आम आदमी पार्टी नाकाम रही।

बस नाम नहीं लिया कह सबकुछ दिया
अपने आरोपों में उन्होंने अरविंद केजरीवाल का नाम तो नहीं लिया। लेकिन इतना जरुर कह दिया की तानाशाही से तानाशाही को खत्म नहीं किया जा सकता। फासीवादी ताकतों को रोकने में AAP का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से नाकाम हो गया। यहीं नहीं रुके इलियास आजमी। उन्होंने कहा की जब से दिल्ली में AAP की सरकार बनी तब से पार्टी के नेताओं की नीति और सोच बदल गई। जो बात पहले योगेंद्र यादव कह चुके थे उसे एक बार इलियास आजमी ने भी दोहराया। उन्होंने कहा की पार्टी में एक व्यक्ति का एकाधिकार है। हाल में संगठन में हुए चुनाव प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए। इलियास आजमी ने कहा की 22 अप्रैल को ही सभी नाम तय किये जा चुके थे। जाते-जाते पार्टी पर मुस्लिम और दलित विरोधी होने का आरोप भी लगा गए इलियास आजमी ।
पहले भी पार्टी पर लग चुके हैं आरोप
दरअसल जो बात इलियास आजमी ने कही औऱ जो आरोप लगाए वो इससे पहले भी लगाए जा चुके हैं। चाहे वो प्रशांत भूषण हों, योगेंद्र यादव हों, शाजिया इल्मी हों, विनोद बिन्नी हो, प्रो.आनंद हो या फिर वयोवृद्ध और संस्थापक सदस्य शांति भूषण। नेताओं की ये वो लिस्ट है जिनके नाम पर कभी आम आदमी पार्टी इतराया करती थी। लेकिन एक वक्त वो आया जब इनके सुर पार्टी की नीति से मेल नहीं खाने लगे। दिल्ली में सरकार बनने के बाद योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण की तरफ से संगठन में बदलाव की मांग की गई। तर्क ये दिया गया था कि एक व्यक्ति एक पद का संविधान पार्टी में लागू हो। जाहिर है अगर इस तर्क को मान लिया जाता तो सबसे पहले संयोजक पद में बदलाव करना पड़ता। यानि केजरीवाल को संयोजक का पद छोड़ना पड़ता क्योंकि वो दिल्ली के सीएम बन चुके थे। इस मांग को लेकर पार्टी दो धड़े में बंट गई। एक में संजय सिंह, कुमार विश्वास, आशीष खेतान, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया जैसे नेता थे। जबकी दूसरे धड़े में जो शामिल थे उन्हें बागी करार दिया गया। जिसमें योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद जैसे लोग शामिल थे। नतीजा ये हुआ की इन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। इलियास आजमी ने पार्टी को अलविदा कहते-कहते जिस तरह के आरोप पार्टी पर लगाए हैं उसने उस पुरानी लड़ाई की याद ताजा कर दी।

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