महिलाएं भी हाजी अली दरगाह में चढ़ा सकेंगी चादर, मुंबई HC ने पाबंदी हटाई

मुंबई: हाजी अली दरगाह में अब महिलाएं भी चादर चढ़ा सकेंगी। मुंबई हाईकोर्ट ने दरगाह के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा ली है। कोर्ट ने ट्रस्ट की तरफ लगाई गई पाबंदी को गैर जरुरी माना। याचिकाकर्ता जाकिया सोमन, नूरजहां सफिया नियाज की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव मोरे ने हाईकोर्ट में पैरवी की। इस मामले में अगस्त 2014 में अदालत में याचिका दायर की गई थी।

अदालत ने दरगाह के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को गैर जरुरी माना था। साथ ही अदालत ने कहा था कि इससे संविधान के तहत महिलाओं को मिले अधिकार का हनन होता है। वहीं दरगाह ट्रस्ट का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले को वो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

कोर्ट ने इस मामले में आपसी सहमति से मामला सुलझाने का भी मौका दिया था। लेकिन दरगाह के अधिकारी महिलाओं को प्रवेश न देने की जिद पर अड़े थे। ट्रस्ट का कहना था कि यह प्रतिबंध इस्लाम का अभिन्न अंग है और महिलाओं को पुरुष संतों की कब्रों को छूने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अगर ऐसा होता है और महिलाएं दरगाह में प्रवेश करती हैं तो यह पाप होगा। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा था कि महिलाओं को दरगाह के भीतरी गर्भगृह में प्रवेश करने से तभी रोका जाना चाहिए अगर यह कुरान में निहित है। सरकार ने कहा दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को कुरान के विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता है।

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