अब ट्रंप एच-1बी वीजा धारकों पर करेंगे सख्ती, बढ़नेवाली है भारतीयों की मुश्किल !




नई दिल्ली: शुक्रवार को लिये गए एक फैसले के बाद अमेरिका में 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों की एंट्री पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी गई। इसके बाद ट्रंप सरकार एक और बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। जिससे एच-1बी वीजा पर अमेरिका आनेवाले प्रवासियों की मुश्किल बढ़नेवाली है। व्हाइट हाउस ड्राफ्ट ऑडर्स पर विचार कर रहा है। उन्हीं में से चार लीक हुए हैं।

Vox.com के मुताबिक इनमें से एक लीगल इमिग्रेशन को कम करने से जुड़ा है। इसमें कानूनी तौर पर अमेरिका आनेवालों की संख्या घटाकर अमेरिकी रोजगार बढ़ाने की बात कही गई है। दूसरे उपायों के साथ इस ड्राफ्ट में विदेशी छात्रों की कड़ी निगरानी और एच-1बी वीजाधारकों को काम पर रखनेवाली कंपनियों की जांच की बात कही गई है। दरअसल भारतीय आईटी कंपनियां अपने कर्मचिरयों को अमेरिका भेजने में बड़े पैमाने पर एच-1बी वीजा का इस्तेमाल करती हैं।

ड्राफ्ट में इस बात का जिक्र है कि होमलैंड सिक्यॉरिटी ऑफिशियल्स यह जांच करेंगे। ओबामा प्रशासन के वक्त एच-1बी वीजा धारकों की पत्नियों को अमेरिका में काम करने की इजाजत दी थी। लेकिन ट्रंप सरकार उस फैसले को बदलने की सोच रही है। इसके पीछे मकसद अमेरिकी युवाओं को ज्यादा रोजगार देने की कोशिश है।

पिछले दिनों एक एग्जिक्युटिव ऑर्डर में 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हलांकि भारतीय आईटी कंपनियां इन सात देशों के लोगों को अपने यहां काम पर नहीं रखते लेकिन एच-1बी वीजा और मुसलमानों के खिलाफ ट्रंप सरकार के सख्त रुख के चलते उनमें डर का माहौल जरुर है।

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One thought on “अब ट्रंप एच-1बी वीजा धारकों पर करेंगे सख्ती, बढ़नेवाली है भारतीयों की मुश्किल !

  • February 3, 2017 at 10:24 am
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    ट्रंप ने भारत को दिया बड़ा झटका एफ1बी वीज़ा मुश्किल में पड़ा …

    भारतीय मूल के नागरिकों के लिए बड़ी समस्या हाल ही अमेरिका की तरफ से आया बड़ा बयान लग सकती है इस वीजा पर रोक आपको बता दे क्या है एफ1बी वीज़ा: “ऐसे विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किया जाता है एफ1बी वीज़ा जो ऐसे ख़ास कार्य में कुशल होते हैं. इसके लिए आम तौर उच्च शिक्षा की ज़रूरत होती है. अमेरिकी सिटीज़नशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज़ के अनुसार, इन ‘खास’ कार्यों में वैज्ञानिक, इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर शामिल हैं. हर साल करीब 65000 ऐसे वीज़ा जारी किए जाते हैं.अमेरिकी कंपनियां इन वीज़ा का इस्तेमाल उच्च स्तर पर बेहतरीन कुशल पेशेवरों की नियुक्ति के लिए करते हैं. हालांकि अधिकतर वीज़ाआउटसोर्सिंग फर्म को जारी किए जाते हैं. यह आरोप लगता रहा है कि ऐसी फर्में इन वीज़ा का इस्तेमाल निचले स्तर की टेक्नोलॉजी नौकरियां भरने के लिए करते हैं. इसके अलावा इसमें लॉटरी सिस्टम से ऐसी आउटसोर्सिंग फर्म को फायदा होता है जो बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं. एच-1 वीजा कंपनियां प्लेसमेंट के दौरान ऑफर करती हैं। इसके लिए अनुबंध किया जाता है, जबकि स्थायी प्रोफेशनल्स के लिए एफ-1 वीजा जरूरी है। कंपनियां भी कोशिश में हैं कि अच्छे प्रोफेशनल्स को एफ 1 वीज़ा पर ही जॉइनिंग दी जाए। अभी ग्रीन कार्ड 10 साल के लिए जारी किया जाता है। इसकी अवधि 5 से 7 साल होने की उम्मीद है। इमिग्रेशन पर अपने विवादित बैन के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निशाना एच1बी वीजा है. एच1बी वीजा नियमों में बदलाव के लिए बिल अमेरिकी कांग्रेस में पेश कर दिया गया है.इस वीज़ा के आधार पर हज़ारों भारतीय अमेरिका में गूगल व माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियों में काम करते हैं.

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