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गुजरात HC से आरक्षण अध्यादेश रद्द, अगले CM के लिए तैयार है ‘कांटों का ताज’

गुजरात HC से आरक्षण अध्यादेश रद्द, अगले CM के लिए तैयार है ‘कांटों का ताज’

गुजरात: आनंदीबेन पटेल के सीएम पद इस्तीफा देने के बाद नए सीएम की तलाश की जा रही है। लेकिन उससे पहले गुजरात हाइकोर्ट ने आरक्षण पर आनंदीबेन पटेल के एक फैसले को रद्द कर दिया है। गुजरात सरकार की तरफ से आर्थिक रुप से पिछड़े अगड़ी जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के पैसले को रद्द कर दिया है। आनंदीबेन पटेल ने 10 फीसदी आरक्षण का ये फैसला पाटीदार आंदोलन के बाद लिया था।

राज्य में पहले से ही पिछड़ों और ओबीसी के लिए 49 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक किसी भी राज्य में किसी भी सूरत में आरक्षण का कोटा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता है। लेकिन जब राज्य सरकार ने आर्थिक तौर पर पिछड़े अगड़ी जाती के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया तो आरक्षण 59 फीसदी तक पहुंच गया। जिसपर हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर किस व्यवस्था के आधार पर सरकार ने ये आरक्षण दिया? क्या इसपर कोई अध्ययन किया गया या ऐसी कोई व्यवस्था बनाई गई जिसमें आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा की जा सकती है? इसका राज्य सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। राज्य सरकार ने कहा था कि आर्थिक रुप से पिछड़े अगड़ों में उन्हें ही आरक्षण का लाभ दिया जाएगा जिनकी सालाना आय 6 लाख से कम है। लेकिन कोर्ट ने इसे सही नहीं माना। हाईकोर्ट का कहना था कि इस तरह आर्थिक रुप से पिछड़े को आधार बनाकर आरक्षण का कोटा तय सीमा से ज्यादा नहीं किया जा सकता।

गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती गुजरात के नए सीएम के सामने ये खड़ी हो गई है कि आरक्षण के मुद्दे पर क्या रास्ता निकालेंगे। क्योंकि 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था पाटीदार आंदोलन के बाद की गई थी। लेकिन अब हाईकोर्ट की तरफ आरक्षण अध्यादेश को रद्द करने के बाद एक बार फिर से पाटीदार अपने लिए आरक्षण की मांग कर सकते हैं। लेकिन राज्य सरकार के लिए चुनौती ये होगी कि वो अब कौन सा रास्ता निकालती है।

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