लोकसभा में GST संशोधन विधेयक पास, पीएम बोले नया साल, नया कानून, नया भारत

नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को GST से जुड़े चारों संशोधन विधेयक पास हो गए। ये चारों विधेयक हैं सेंट्रल जीएसटी, इंटिग्रेटेड जीएसटी, यूनियन जीएसटी और मुआवजा कानून बिल। लोकसभा में GST पर तकरीबन 8 घंटे तक बहस हुई। इन विधेयक के पास होने के बाद पीएम मोदी ने कहा नया साल, नया कानून और नया भारत।

लोकसभा में GST पर चर्चा की की शुरुआत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की। चर्चा की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा GST गेमचेंजर की तरह है। उन्होंने बिल के कुछ प्रावधानों का जिक्र भी किया। जबकि इसके जवाब कांग्रेस की तरफ से वीरप्पा मोइली ने कहा GST गेमचेंजर नहीं बल्कि बेबी स्टेप है।

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बहस की शुरुआत करते हुए जेटली ने कहा GST के तहत खाने-पीने की जरुरी सामानों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यानि पहला टैक्स स्लैब शून्य होगा जबकि दूसरा स्लैब 5 फीसदी तीसरा स्लैब 12 और 18 फीसदी का है। वित्त मंत्री ने कहा लग्जरी टैक्स स्लैब को दो भागों में बांटा या है- टैक्स और सेस। इसमें टैक्स की दर 28 फीसदी होगी। जेटली ने कहा मौजूदा वक्त में लग्जरी सामानों पर टैक्स 40 से 65 फीसदी है। लेकिन GST लागू होने के बाद उन सामानों पर 28 फीसदी टैक्स लगेंगे।

उन्होंने कहा GST लागू करने के बाद शुरुआती पांच साल में जिन राज्यों को नुकसान होगा, उनकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी।

सेंट्रल जीएसटी की वसूली केंद्र सरकार करेगी।

स्टेट जीएसटी की वसूली राज्य सरकार करेगी।

इंटिग्रेटेड जीएसटी के तहत अगर दो राज्यों के बीच कारोबार होता है तो उसपर यह टैक्स लगेगा। इसे केंद्र सरकार वसूलकर दोनों राज्यों में बराबर बांट देगी।

यूनियन टेरेटरी जीएसटी के तहत यूनियन गवर्नमेंट द्वारा शासित किये जाने वाले गुड्स, सर्विस या दोनों पर लगेगा। इसे केंद्र सरकार ही वसूलेगी।

बारी जब विपक्ष की आई तो कांग्रेस की तरफ विरप्पा मोइली ने GST पर सवाल उठाते हुए इसके गेमचेंजर होने के दावे को खारिज कर दिया। मोइली ने कहा यह कोई गेमचेंजर नहीं बल्कि बहुत छोटा कदम है। मोइली ने कहा उनकी सरकार GST पर आगे बढ़ना चाह रही थी। लेकिन तब विपक्ष में बैठी बीजेपी ने इसमें रुकावट डाल दी।

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मोइली ने सरकार से सवाल किया कि जब GSTको 6 साल बाद लागू किया जा रहा है तो इससे हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है। मोइली ने कहा 2010 में GST लागू नहीं होने की वजह से सालाना 1 से 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अगर कुल नुकसान की बात करें तो देश को तकरीबन 10 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है।

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दरअसल GST का इतिहास काफी पुराना है। टैक्स सुधार को लेकर वाजपेयी सरकार ने ही साल 2000 में एक कमिटी गठित की थी। 2004 में केलकर कमेटी ने GST का सुझाव दिया। 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने GST को अप्रैल 2010 से लागू करने का प्रस्ताव रखा। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। फिर अप्रैल 2011 ले लागू करने का एलान किया गया। लेकिन बात फिर अटक गई। सरकार इसे 1 जुलाई से लागू करने का टारगेट लेकर चल रही है।

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