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नोटबंदी के बाद 2 लाख जमा करवाने वालों से भी होगी पूछताछ!

नोटबंदी के बाद 2 लाख जमा करवाने वालों से भी होगी पूछताछ!

नई दिल्ली: नोटबंदी लागू करने के बाद सरकार ने कहा था कि जिनके बैंक अकाउंट में 2.50 लाख तक की करम जमा होगी उनसे किसी तरह की पूछताछ नहीं की जाएगी। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है वो ये है कि जिनके बैंक अकाउंट में नोटबंदी लागू होने के बाद 2 लाख भी जमा हुए हैं उनकी भी जांच हो सकती है। आरबीआई ने इससे संबंधित जानकारी विभिन्न बैंकों से मांगे हैं।

इसमें ये देखा जाएगा कि जिनके बैंक अकाउंट में अबतक दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं थे और नोटबंदी के बाद वो दो से ढाई लाख रुपये अपने बैंक अकाउंट में जमा करवाते हैं तो उनकी जांच की संभावना ज्यादा है। नोटबंदी के बाद इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं कि काला धन खपाने के लिए लोग तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। इसी के तहत दूसरों के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल भी शामिल है। जिसके बाद इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।

आरबीआई इस तरह के बैंक अकाउंट की जानकारी आयकर विभाग को देगा और आयकर विभाग इसकी जांच करेगा। आरबीआई की तरफ से सभी बैंकों को इस तरह के अकाउंट के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिये जा चुके हैं। आरबीआई ने इस बारे में सभी बैंकों को चिट्टी लिखी है और उनसे कुछ खास ब्रांचों के अकाउंट्स की जानकारी मांगी है। इसमें खासकर टियर 2 और टियर 3 के शहर के ब्रांच शामिल हैं।

आरबीआई ने इससे पहले बैंकों को जो चिट्ठी लिखी थी उसमें कैश निकासी या जमा कराने में शक होने पर अंदरुनी ऑडिट की बात कही थी। नोटबंदी लागू होने के बाद जनधन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर काला धन खपाने में होने की आशंका है। इसलिए क्योंकि नोटबंदी लागू होने के बाद दो हफ्तों में जनधन खातों में 27 हजार करोड़ जमा कराए गए। जबकि पिछले दो सालों में इस तरह के जनधन खातों में 45 हजार करोड़ जमा हुए थे।
जांच में ये बात भी निकल कर सामने आई है कि एक्सिस बैंक के दो ब्रांच में 66 फर्जी अकाउंट में 160 करोड़ रुपये जमा कराए गए। अबतक एक्सिस बैंक के 24 कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है जबकि एचडीएफसी बैंक के 4 कर्मचारी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी शुक्रवार को कहा था कि जिन्होंने अपने अलग –अलग अकाउंट में 2-2 लाख रुपये जमा कराकर काले को सफेद करने की कोशिश की है वो भी बच नहीं पाएंगे। क्योंकि कहीं न कहीं बैंकों में दी गई उनकी व्यक्तिगत जानकारी एक दूसरे से मेल खा रही हैं। इस आधार पर उनकी पहचान भी की जा रही है।

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