गोरखपुर से योगी बेदखल और फूलपुर में मुरझाया कमल, बुआ-बबुआ की जोड़ी सुपरहिट

लखनऊ:  यूपी में उपचुनाव तो लोकसभा की दो सीटों पर हुआ। नतीजे भी दो सीटों के आए। लेकिन इन नतीजों ने पिछले 29 साल के इतिहास को पलट कर रख दिया। जिस गोरखपुर में सीएम योगी पांच बार से सांसद रह चुके थे उस गोरखपुर की जनता ने उनकी प्रार्थना अस्वीकार कर दी। गोरखपुर उपचुना में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली। जबकि फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार की जीत हुई।

फूलपुर सीट यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट थी जो उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में केशव प्रसाद को यहां 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। लेकिन इसबार बीजेपी उम्मीदवार को फूलपुर की जनता ने नकार दिया। और बुआ-बबुआ के समीकरण को स्वीकार कर लिया।

इस हार की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि उम्मीद ये जताई जा रही थी कि यूपी में कम से कम एक सीट पर तो बीजेपी जीतेगी। वो सीट गोरखपुर थी। लेकिन जो सियासी समीकरण मायावती और अखिलेश के साथ आने के बाद तैयार हुआ उसके सामने गोरखपुर के पूर्व सांसद और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की पूरी रणनीति फेल हो गई।

1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद पहली बार समाजवादी पार्टी और बीएसपी एक साथ आए थे। इन बीच के सालों में दोनों एक दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं। लेकिन 23 साल बाद जब सपा और बसपा का साथ बना तो गोरखुपर में 29 साल पुरानी योगी की सत्ता उखड़ गई।

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