अभिनेता, साहित्यकार और निर्देशक गिरीश कर्नाड का निधन

बेंगलुरु:  मशहूर फिल्मकार और अभिनेता गिरीश कर्नाड का निधन हो गया। वो लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे। बेंगलुरु में अपने घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली। लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावे उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका था। वो कई भाषा के धनी थे।

मालगुड़ी डेज जैसे धारावाहिक में उन्होंने अभिनय किया था। और इसी अभिनय से उन्हें एक पहचान भी मिली। गिरीश कर्नाड को 1978 में फिल्म में उनके अभिनय के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। 1978 में उन्हें साहित्य जगत का ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी नवाजा गया था। हाल में आई सलमान की फिल्म एक था टाइगर में भी उन्होंने दमदार भूमिका निभाई थी।

1960 के दशक में नाटकों के लेखन से कर्नाड को लोग पहचानने लगे थे। लगभग चार दशक से भी ज्यादा वक्त तक गिरीश कर्नाड ने नाटकों में काम किया। कर्नाड ने अंग्रेजी के भी कई प्रतिष्ठित नाटकों का अनुवाद भारतीय भाषा में किया। कर्नाड ने हिंदी और कन्नड़ फिल्मों में बतौर अभिनेता, निर्देशक और स्क्रीन राइटर के तौर पर काम किया। कर्नाड को चार फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिले थे।

कर्नाड ने 1970 में कन्नड़ फिल्म संस्कार से अभिनय और स्क्रीन राइटिंग की शुरुआत की थी। हिंदी भाषा में उनकी पहली आई फिल्म 1974 में जादू का शंख थी। गिरीश कर्नाड ने सलमान की फिल्म एक था टाइगर और टाइगर जिंदा में भी अभिनय किया था।

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