फ्रांस के साथ राफेल फाइटर प्लेन पर लगी मुहर

भारतीय वायुसेना अब एक नया जोश और नई ताकत दिखाई देगी। इसकी वजह ये है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर प्ले की डील अब फाइनल हो चुकी है। जिसके मुताबिक फ्रांस भारत को 36 राफेल फाइटर देगा। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस दौरे के दौरान राफेल विमान खरीदने पर बात हुई थी। जिसके बाद जनवरी महीने में फ्रांस के साथ भारत ने एग्रीमेंट किया था। लेकिन इस डील को अंजाम तक पहुंचने में एक लंबी चौड़ी सौदेबाजी का दौर चला दोनों देशों के बीच। डील पर उस वक्त संकट के बादल मंडराने लगे जब दोनों पक्षों में यूनिट प्राइस और भारत में राफेल की असेंबलिंग को लेकर रजामंदी नहीं बन पाई थी। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने डील के मुकम्मल होने में हुई देरी पर कहा था कि फ्रांस काफी टप नेगोशिएटर है और इसके लिए अच्छी सौदेबाजी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक फ्रांस के साथ ये डील 7.8 बिलियन यूरो यानि तकरीबनन 59,000 करोड़ रुपये का है। राफेल सौदा के पक्का होने से अब वायुसेना के पास पराने विमानों को हटाने के लिए एक नया विकल्प सामने आया है। दरअसल वायुसेना पुराने प्लेन को हटाना चाहती थी। लेकिन कोई विकल्प नहीं होने की वजह से ये मुमकिन नहीं हो पा रहा था। लेकिन अब ये रास्ता आसान हो गया है।
राफेल की क्या है खासियत ?
राफेल का फ्रेंच भाषा में मतलब होता है तूफान। ये दो इंजन वाला मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है। जो 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ा भर सकता है। इसकी फ्यूल कैपेसिटी 4700 किलोग्राम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें हवा में भी ईंधन भरा जा सकता है और ये लगातार 10 घंटे तक उड़ान भर सकता है। राफेल को लीबिया, माली और इराक में इस्तेमाल किया जा चुका है। अफगानिस्तान में अल कायदा के खिलाफ नाटो के अभियान में भी राफेल ने अहम रोल निभाया था।

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