फोर्टिस अस्पताल ने डेंगू से बच्ची की मौत के बाद थमाया 18 लाख का बिल, 700 में बेचा कफन

नई दिल्ली:  हरियाली भरी फुलवारी और उस फुलवारी के सामने बने इस शानदार इमारत के भीतर सात साल की आद्या सिंह ने दम तोड़ दिया। आद्या 15 दिन तक गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती रही। अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे बाद उसे वेंटिलेटर पर डाल दिया गया। जिस रफ्तार से आद्या की सांसें मद्धम हो रही थी उससे दोगुनी रफ्तार से अस्पताल के बिल का मीटर आगे भाग रहा था। 15 दिन बाद आद्या की सांसों ने उसके शरीर का साथ छोड़ दिया। अस्पताल ने इस थम चुकी जिंदगी की कीमत लगाई 18 लाख रुपये।

अस्पताल ने एक हाथ से हाड़ मांस का पुतला बन चुकी आद्या का शिथिल शरीर परिवार को सौंपा और दूसरे हाथ से 18 लाख का बिल थमा दिया। जिस तरह से गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में आद्या का इलाज हुआ और जिस तरह से 18 लाख का बिल तैयार किया गया उसके बाद आद्या के परिजनों ने फोर्टिस अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल से 18 लाख के बिल पर रिपोर्ट मांगी है।

दिल्ली के द्वारका में रहनेवाले जयंत सिंह ने अपनी बेटी आद्या को डेंगू होने के बाद रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन बाद में उसे गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में रेफर कर दिया गया। बच्ची के पिता जयंत सिंह ने बताया अस्पताल की तरफ से उनकी बेटी के इलाज के लिए 18 लाख का बिल थमाया गया। जिसमें 660 सिरिंज, 2700 ग्लब्स का बिल भी शामिल है। लेकिन 18 लाख का बिल तैयार करने के बाद भी अस्पताल उनकी बेटी को बचा नहीं सका। और 15 दिनों बाद आद्या की मौत हो गई।

आईसीयू, दवाई, डॉक्टर की फीस, सिरिंज, ग्लब्स का बिल हुआ था 18 लाख। सफेद कपड़े में लिपटी आद्या को जब आईसीयू से बाहर निकाला गया तो वो इस दुनिया को नकार चुकी थी। लेकिन अस्पताल को ये एहसास हुआ कि 18 लाख के बिल में थोड़ी कमी रह गए। जाते जाते बच्ची के पिता से कफन की कीमत भी मांग ली। जिस कपड़े में आद्या को लपेट कर रखा गया था उसकी कीमत हुई 700 रुपये। क्योंकि उस कफन पर फोर्टिस अस्पताल का सील ठप्पा लगा था। इसलिए कफन ब्रांडेड हो गया।

फोर्टिस अस्पताल ने आद्या के इलाज के खर्चे का पर्चा 20 पन्नों में तैयार किया था। जिसमें दवाई का बिल चार लाख का था। आद्या के पिता का कहना है कि जो ग्लूकोज स्ट्रिप 15 रुपये में मिलती है उसके लिए 500 रुपये लिये गए। 2700 ग्लब्स, 660 सीरिंज और 900 गाउन के पैसे भी बिल में शामिल थे। डॉक्टर की फीस 52 हजार हुई थी। दो लाख 17 हजार के मेडिकल टेस्ट का बिल भी तैयार किया गया था।

ये पूरी घटना ट्वीटर पर शेयर की गई। साथ में अस्पताल के 20 पन्नों का बिल भी शेयर किया गया। बात स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तक पहुंची। जिसके बाद अस्पताल से आद्या के इलाज की पूरी जानकारी मांगी गई है। जिसमें अस्पताल को ये भी बताना है कि उसने इलाज में कौन सी दवाई और कौन सी ऐसी तकनीक लगाई कि बिल 18 लाख पहुंच गया और मरीज को भी बचाया ना जा सका।

इस मामले में अस्पताल की तरफ से सफाई आई है। जिसमें अस्पताल ने कहा है कि मरीज को डेंगू था और उसे काफी गंभीर हालत में लाया गया था। अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे बाद ही उसे वेंटिलेटर पर डाल दिया गया था। जिसके बारे में परिवार को पूरी जानकारी दी गई थी। मरीज की हालत के बारे में रोजाना परिवार वालों को जानकारी दी जा रही थी। इलाज के दौरान मानक चिकित्सा का पालन किया गया।

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