इंसान कैसे खा गया जानवरों का 900 करोड़ का चारा, 2 मिनट में जानें पशुपालन घोटाला

इंसान कैसे खा गया जानवरों का 900 करोड़ का चारा, 2 मिनट में जानें पशुपालन घोटाला

पटना/ बिहार:  रांची की सीबीआई अदालत ने चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में आरजेडी सुप्रीमो और बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव को दोषी करार दिया है। उन्हें 3 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। शनिवार को जिस मामले में लालू को दोषी ठहराया गया है वो देवघर ट्रेजरी से जुड़ा है। जहां से गलत तरीके से 84.5 लाख रुपये की निकासी की गई थी।

कैसे शुरु हुआ चारा घोटाला?

चारा घोटाला शुरु कब से हुआ इस बारे में पुख्ता तौर पर तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना जरुर बताया जा सकता है कि ये मामला कब सामने आया। 27 जनवरी 1996 को इस मामले में पहला मामला चाईबासा थाने में दर्ज किया गया। लेकिन चारे का ये खेल इससे पहले से ही खेला जा रहा था।

इसमें गलत तरीके से ट्रेजरी से जो पैसे निकाले जाते थे उसमें सभी का हिस्सा बंटा था। नीचे से लेकर ऊपर तक के साहब और मंत्री यहां तक की सीएम तक बंटवारे का पैसा पहुंचता था। घोटालेबाजों ने केवल चारा ही नहीं खाया बल्कि पशु को ढोने और उनके दवाई तक पी गए थे। हर चीज के फर्जी बिल तैयार किये गए और पैसों की निकासी कर ली।

सौजन्य- एएनआई

मामले के जांच में खुलासा हुआ कि अफसरों ने कागजों में 100-130 क्विंटल चारा 12-13 बैल को स्कूटर पर लादकर एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाया। दरअसल इन चीजों की ढुलाई कागजों पर तो ट्रक पर दिखाई गई लेकिन गाड़ी का जो नंबर दिया गया था वो स्कूटर का था।

खरीद कोई नहीं लेकिन पैसे खर्च हो गए

सीबीआई की जांच में ये बात सामने आई कि पशुपालन विभाग की तरफ से ना तो चारे की खरीद हुई थी और ना ही बैलों की। सारा काम कागजों पर किया गया। लेकिन पैसों की निकासी असली की गई।

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