जानिये चुनाव आयोग ने क्यों AAP के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराया?

नई दिल्ली:  चुनाव आयोग की तरफ से आम आदमी पार्टी के विधायकों को अयोग्य ठहराने के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने कहा मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति रिटायरमेंट से पहले सारे पेंडिंग केस खत्म करना चाहते हैं। इसलिए आयोग फटाफट बिना दलील सुने पुराने मामलों को निपटा रहा है।

कैसे विवादों में घिरे AAP के 20 विधायक?

दरअसल ये मामला 2015 से जुड़ा है। दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो दिल्ली सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त रहा। इस मामले को लेकर प्रशांत पटेल नाम के वकील ने इसे लाभ का पद बताकर राष्ट्रपति के पास शिकायत की। प्रशांत पटेल ने इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। जिसके बाद मामला चुनाव आयोग पहुंचा। इस मामले में फंसे पूर्व विधायक जरनैल सिंह ने पंजाब चुनाव के वक्त इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद लाभ के पद में फंसे विधायकों की संख्या 21 से घटकर 20 हो गई थी।

केंद्र सरकार ने विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के फैसले का विरोध करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में आपत्ति जताई। हाईकोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली में सिर्फ एक संसदीय सचिव हो सकता है। जो मुख्यमंत्री के पास होगा। इन विधायकों को यह पद देने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।

आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 23 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति रिटायर हो रहे हैं। उसके बाद ना तो मोदी जी और ना ही ब्रह्मा उन्हें चुनाव आयुक्त बनाए रख सकती है। पीएम को खुश करने के लिए ही चुनाव आयोग ने ये फैसला लिया है। चुनाव आयोग ने हमारी दलील सुने बिना ये फैसला लिया है।

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