पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका अलग हुआ, ओबामा ने की ट्रंप की आलोचना

नई दिल्ली:  अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को अलग करने का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा हमारे नागरिकों के संरक्षण के अपने गंभीर कर्तव्यों को पूरा करने के लिए अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से हट जाएगा। हम उससे हट रहे हैं और फिर से बातचीत शुरु करेंगे। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन को लेकर पेरिस समझौते में अमेरिकी हितों के लिए एक उचित समझौता हो।

ट्रंप ने अलग होने के फैसले का एलान करते हुए कहा कि पेरिस जलवायु समझौते में चीन और भारत जैसे प्रदूषित देशों के लिए कोई सख्ती नहीं की गई है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में 195 देशों के पेरिस समझौते को गलत करार देते हुए उससे अलग होने का एलान किया। उन्होंने कहा इस समझौते को समर्थन देकर मैं अमेरिकी हितों का नुकसान नहीं कर सकता। ये समझौता अमेरिका फर्स्ट के हमारे नारे पर खरा नहीं उतरता है।

ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी निंदा की है। ओबामा ने कहा जलवायु समझौते पर इस तरह के फैसले कर और समझौते का पालन नहीं कर अमेरिका आनेवाली पीढ़ियों को खतरे में डाल रहा है। यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष जीन क्लाउडे ने भी ट्रंप के इस कदम को काफी गलत फैसला करार दिया है।

कब और क्यों हुआ था पेरिस जलवायु समझौता?

ग्रीन हाउस गैसों के इमिशन को कम करने के लिए दिसंबर 2015 में दुनियाभर के 195 देशों के बीच पेरिस में ये करार हुआ था। उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे। प्रकृति को असामान्य जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरे से बचाने के लिए दुनिया के 195 देश कार्बन इमीशन को कंट्रोल करने पर राजी हुए थे। इसके तहत सभी देशों के लिए कार्बन इमीशन तय करने का टार्गेट रखा गया था।

अमेरिका पर सभी की नजर इसलिए थी क्योंकि कार्बन इमिशन कम करने के लिए अमेरिका दूसरे देशों की फंडिंग की बात करता रहा था। अमेरिका की आबादी दुनिया की 4 फीसदी है लेकिन वह दुनियाभर में होनेवाले कार्बन इमीशन में 33 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। इस समझौते से हटने के बाद अमेरिका के लिए कार्बन इमीशन की शर्तों को मानने की बाध्यता नहीं होगी। साथ अब दूसरे देशों को फंडिंग के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

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