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डोकलाम पर जापान ही नहीं और भी देश हैं भारत के साथ, परास्त हुआ चीन

डोकलाम पर जापान ही नहीं और भी देश हैं भारत के साथ, परास्त हुआ चीन

नई दिल्ली:  डोकलाम पर जिस तरह से जापान ने भारत के कदम को सही ठहराया है उसके बाद से चीन बौखलाया हुआ है। दरअसल जापान से पहले अमेरिका ने भी भारत के पक्ष में बयान देते हुए कहा था कि भारत और अमेरिका एक अच्छे दोस्त हैँ। भारत और चीन को डोकलाम विवाद का हल शांतिपूर्ण कोशिशों से निकालना चाहिए।

पीएम मोदी के जापान दौरा ने अब रंग दिखाना शुरु किया है। डोकलाम के मुद्दे पर जापान ने खुले तौर पर भारत का साथ दिया है। जापान के राजदूत केंजी हीरामत्सू ने कहा डोकलाम को लेकर पिछले तकरीबन दो महीनों से भारत और चीन में विवाद है। इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। जापान ने माना कि डोकलाम विवाद चीन और भूटान के बीच है। लेकिन भूटान के साथ भारत के द्वीपक्षीय संबंध हैं इसलिए भारत भूटान के हितों की रक्षा के लिए डोकलाम में हस्तक्षेप कर रहा है और ये बिल्कुल सही है।

हाल में भारत दौरे पर आईं ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप ने कहा था चीन को डोकलाम विवाद पर संयम बरतना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा था कि उसे भारत के साथ बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन की विस्तारवादी नीति पर भी चेतावनी दे चुका है।

पीएम मोदी के वियतनाम दौरे के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती आई है। दक्षिण चीन सागर में विवाद को लेकर वियतनाम और चीन के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है। जबकि भारत ने वियतनाम की लगातार मदद की है। भारत वियतनाम को आकाश मिसाइल भी देने पर विचार कर रहा है।

इतना ही नहीं यूरोपीय देश भी डोकलाम विवाद पर भारत के पक्ष में अपने विचार रख सकते हैं। हलांकि अभी किसी यूरोपीय देश का पक्ष सामने नहीं आया है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं निकाला जा सकता कि वो चीन के साथ रहने का मन बना रहे हैं। क्योंकि चीन की विस्तारवादी सोच से पूरी दुनिया परिचित है। नॉर्थ कोरिया जैसे तानाशाही मुल्क का साथ देकर चीन ने खुद अपनी छवि खराब की है।

चीन ने हाल ही में कहा था कि बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे देश डोकलाम के मुद्दे पर उसके साथ हैं। लेकिन चीन का ये प्रॉपगेंडा फ्लॉप साबित हुआ। क्योंकि इन देशों में से किसी ने भी अभी तक चीन के पक्ष में या भारत के खिलाफ अपने विचार नहीं रखे हैं। हलांकि पिछले दिनों श्रीलंका ने साफ कर दिया था कि वो अपनी समुद्री सीमा का इस्तेमाल सैनिक मकसद से नहीं करने देगा।

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