डॉक्टर ने कहा दिया था आपका बच्चा मर गया है, अंतिम संस्कार के वक्त रोने लगा बच्चा

नई दिल्ली:  दिल्ली में सफदरजंग अस्पताल की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। पीड़ित के मुताबिक अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके नवजात बच्चे को मृत बता दिया था। लेकिन जब परिवार वाले बच्चे का अंतिम संस्कार करने लगे तो बच्चे के शरीर में हलचल हुई और जिस बच्चे को डॉक्टरों ने मृत बताया था वो बच्चा जीवित था।

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक महिला को प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती कराया गया। महिला के परिजनों के मुताबिक रात के वक्त कई बार डॉक्टरों से उन्होंने कहा कि मरीज की तकलीफ बढ़ रही है। जिसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को देखने के बाद कहा अभी टाइम लगेगा। इसके बाद डॉक्टर वहां से चले गए। मरीज के परिजनों के मुताबिक रात के वक्त जब तकलीफ बढ़ी तो डॉक्टर को बताया गया लेकिन कोई देखने नहीं आया। इसके बाद सुबह साढ़े पांच बजे खुद से बच्चा बाहर आ गया।

परिजनों ने बताया इसके बाद अस्पताल के कर्मचारी बच्चे को जांच के लिए ले गए। लेकिन वो बच्चे को एक कपड़े में लपेटकर वापस लेकर आए और कहा गया कि आपका बच्चा मर चुका है। स्कूल के कर्मचारियों ने कपड़े में लिपटे बच्चे के मुंह पर टेप भी लगा दी थी। जिसमें उसे मृत बताया गया था।

इसके बाद परिवार के सदस्य बच्चे को घर लेकर आए और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरु की। तभी बच्चे के पिता रोहित की बहन को बच्चे में कुछ हरकत लगी। जब उसे खोला गया तो बच्चे की धड़कन चल रही थी और वह हाथ पैर चला रहा था।

बच्चे के पिता को जब ये पता चला कि उनका बच्चा जिंदा है तो उन्होंने कहा ये अस्पताल की बड़ी लापरवाही है। इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। उनका कहना है कि अगर वक्त रहते बच्चे के मुंह पर लगी पट्टी नहीं खोली होती तो बच्चा सचमुच में मर जाता। ये अस्पताल की तरफ से बहुत बड़ी लापरवाही है। इसके लिए जो भी दोषी हों उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दिये हैं। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ए के राय ने बताया इस मामले की जांच की जा रही है। क्योंकि किसी भी नवजात बच्चे को मृत घोषित करने से पहले उसे 1 घंटे तक निगरानी में रखा जाता है। लेकिन इस बच्चे में उस प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं इसकी जांच की जाएगी।

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