जानिये UPA 2 और Modi सरकार में हुए Surgical Strike में क्या है फर्क?

दिल्ली:  28 सितंबर की रात हुए Surgical Strike के बाद बहस चल पड़ी। जिसमें मोदी सरकार में पीओके में सेना की तरफ से किये गए Surgical Strike पर सवाल उठाए गए। नए दावे किये गए जिसमें कहा गया कि Surgical Strike उस वक्त भी किये गए थे जब केंद्र में यूपीए 2 की सरकार थी। अब एक दस्तावेज भी सामने आया है जिसमें ये दवा किया गया है कि 2011 में सेना ने Surgical Strike किया था। लेकिन मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए Surgical Strike और 28 सितंबर को मोदी सरकार में हुए Surgical Strike के बीच फर्क भी है।

UPA-2 में किस तरह का था Surgical Strike?

  • UPA 2 यानि मनमोहन सिंह सरकार के वक्त 2011 में सेना ने जो Surgical Strike किया था उसका स्केल काफी छोटा था। यानि वो सीमित दायरे में किया गया था।
  • उस वक्त सरकार की तरफ से Surgical Strike के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं दी गई थी
  • Surgical Strike में अगर कोई गड़बड़ी होती तो उसके लिए सेना जिम्मेदार होती
  • Surgical Strike की मंजूरी ऑफ द रिकॉर्ड दी गई थी
  • अगर कार्रवाई की नौबत आती तो सेना के अधिकारी पर कारर्वाई होती। क्योंकि सरकार ने खुद को उससे अलग रखा था।

मोदी सरकार में किस तरह का था Surgical Strike?

  • मोदी सरकार ने लार्ज स्केल पर Surgical Strike किया। इसका दायरा ज्यादा बड़ा था
  • सरकार ने अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई थी। प्रधानमंत्री के स्तर से ऑपरेशन को मंजूरी दी गई थी।
  • सेना को Surgical Strike करने के लिए राजनीतिक मंजूरी दी गई थी।
  • Surgical Strike में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर सरकार उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार थी
  • पीओके में Surgical Strike करने के लिए ऑन द रिकॉर्ड मंजूरी दी गई थी

अगर किसी तरह से बात बिगड़ जाती तो उसमें सेना का नाम कहीं नहीं आता। सेना को किसी तरह के विवाद में घसीटने से बचाने के लिए ही मोदी सरकार ने औपचारिक तौर पर ऑन द रिकॉर्ड ऑपरेशन की मंजूरी दी थी।

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