इन वजहों से नोटबंदी कामयाब नहीं हुई, इनकम टैक्स विभाग की रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली:  8 नवंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया तो उनलोगों की बेचैनी खासतौर से बढ़ गई थी जिन्होंने अपने पास काली कमाई का अंबार लगा रखा था। उन्हें चिंता इस बात की हो रही थी कि काली कमाई के अपने टकसाल को किस तरह से बचाएं। क्योंकि 500 और 1000 रुपये के नोट बेकार हो चुके थे। लेकिन कुछ ही दिनों में उन्होंने उसका भी उपाय ढूंढ निकाला। आयकर विभाग ने इसपर खास रिपोर्ट तैयार की गई है। 27 पन्नों की इस रिपोर्ट जिक्र किया गया है कि नोटबंदी के बाद किस तरह से सरकार के रडार पर आने से धन्ना सेठों और संस्थानों ने खुद को बचाया। कालेधन को बचाने के लिए व्यापारियों और धन कुबेरों ने जो हथकंडे अपनाए उसी का जिक्र आयकर विभाग की रिपोर्ट में किया गया है।

  1. रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से कारोबारियों ने कैश को खपाने के लिए टैली सॉफ्टवैयर में बैक डेट में एंट्री दिखाई।
  2. आयकर विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि पेट्रोल पंप मालिकों ने किस तरह से अपनी रोजाना की कमाई बढ़ा चढ़ा कर दिखाई। ताकि वो पहले से जमा कैश को बैंकों में जमा करवा सकें।
  3. शेल कंपनियों में कालेधन को खपाने के लिए संदिग्ध एंट्री की।
  4. रिपोर्ट में ज्वैलर्स और बुलियन कारोबार का भी जिक्र है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पैन कार्ड रिपोर्टिंग से बचने के लिए उन्होंने छोटी रकम की खरीद और बिक्री की बिल तैयार की।
  5. कई कारोबारियों ने फ्यूचर ट्रांजैक्शन के नाम पर बड़ी मात्रा में पुरानी करेंसी बतौर एडवांस स्वीकर की।
  6. कोऑपरेटिव बैंक के बड़े अधिकारियों ने बैंक के करेंसी चेस्ट से नई करेंसी का इस्तेमाल अपनी निजी पुरानी करेंसी को बदलने में किया। जबकि नई करेंसी ग्राहकों की पूरानी करेंसी बदलने के लिए दी गई थी।
  7. नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुए ज्यादा कैश के मामलों में 57.5 फीसदी मामले कारोबारियों द्वारा कैश में की गई बिक्री के रहे। वहीं जमा हुआ महज 20 फीसदी कैश उनकी नोटबंदी के एलान से पहले हुई बिक्री से इकट्ठी हुई।
  8. आयकर विभाग ने इस तरह के 17.92 लाख लोगों की पहचान की है जिन्हें गैरकानूनी तरीके से कैश ट्रांजैक्शन में शामिल पाया गया।
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