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फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन की भाषा पर सांसदों ने रोक लगाने की मांग की

फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन की भाषा पर सांसदों ने रोक लगाने की मांग की

दिल्ली:  फेयरनेस क्रीम बनाने वाली कंपनी अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए विज्ञापनों में ये दिखाने की कोशिश करती हैं कि अगर आपका रंग गोरा नहीं है तो आप कामयाब नहीं हो सकते। फेयरनेस प्रोडक्ड बेचनेवाली इन कंपनियों की इस सोच पर सांसदों ने विरोध जताया है। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को सांसदों ने संसद में विरोध दर्ज करवाया।

सांसदों का कहना था कि फेयरनेस क्रीम बेचने के लिए काले रंग के बारे में कही गई बातों से महिलओं में हीन भावना आती है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि गोरे रंग का सपना दिखाने वाली इन फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों में गोरे रंग को विशेषता के तौर पर बताया जाता है। उन्होंने कहा सफलता के लिए इंसान के रंग की नहीं बल्कि दिमाग की जरुरत होती है। मिशेल ओबामा और बराक ओबामा इसके उदाहरण हैं। दुनिया बराक ओबामा को रंग के लिए नहीं उनके काम के लिए जानती है।

महिला सांसदों ने संसद में कहा था कि फेयरनेस क्रीम की भाषा महिलाओं के सम्मान के खिलाफ होती है। कांग्रेस सांसद विप्लव ठाकुर ने राज्यसभा में शून्यकाल में अलग अलग कंपनियों की फेयरनेस क्रीम का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि ऐसी क्रीम महिलाओं में हीन भावना पैदा करती है। सरकार को इस तरह के फेयरनेस क्रीम पर रोक लगाना चाहिए।

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