शनिवार से होनेवाली दिल्ली मेट्रो कर्मचारियों की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली: शनिवार से दिल्ली मेट्रो के नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्माचारियों की हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हड़ताल के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। इससे पहले मेट्रो के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर 30 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी। शुक्रवार को इसे लेकर डीएमआरसी और कर्मचारी यूनियन के बीच बैठक भी हुई थी लेकिन वो बेनतीजा रही थी।

कर्मचारियों की हड़ताल पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा था मेट्रो कर्मियों की सभी उचित मांगें पूरी की जानी चाहिए। हड़ताल से लाखों लोगों को असुविधा होगी। हड़ताल नहीं होनी चाहिए। मैं कर्मचारियों से अपील करता हूं कि वो हड़ताल ना करें।


दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो से सफर करनेवालों की मुश्किल शनिवार से बढ़ सकती थी। क्योंकि मेट्रो के हजारों कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शनिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे थे। डीएमआरसी और कर्मचारियों के बीच बैठक हुई के बेनतीजा रहने के बाद कर्मचारियों ने शनिवार से हड़ताल पर जाने का फैसला किया था।

इस हड़ताल में मेट्रो के तकरीबन 9 हजार नॉन-एग्जिक्यूटिव कर्मचारी शामिल होनेवाले थे। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की वजह से इसका असर मेट्रो की सेवाओं पर पड़ना स्वाभाविक था। मेट्रो के नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों ने पहले ही मांगें पूरी नहीं होने पर 30 जून से हड़ताल पर जाने की धमकी दे दी थी।

इस हड़ताल को देखते हुए दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने डीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर को तत्काल इसका हल निकालने के निर्देश दिये थे। मैनेजिंग डारेक्टर को लिखी चिट्ठी में गहलोत ने कहा था विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाए। जिससे मेट्रो की सेवाएं बाधित न हो। क्योंकि अगर मेट्रो की सेवाएं बाधित होंगी तो इससे लाखों लोगों को परेशानी होगी।

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली मोट्रो के नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारी बांह पर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे थे और अलग अलग मेट्रो स्टेशनों पर आंशिक धरना भी दे रहे थे। इनमें ट्रेन ऑपरेटर, स्टेशन कंट्रोलर, टेक्निशियन, ऑपरेटिंग स्टाफ, मेंटेनेंस स्टाफ शामिल हैं।

पिछले साल जुलाई में भी इस तरह का संकट सामने आया था। लेकिन तब मेट्रो प्रबंधन ने इसका हल निकाल लिया था। अब कर्मचारियों का कहना है कि पिछले साल जुलाई में मेट्रो प्रबंधन ने उनसे जो वादे किये थे उसे भी पूरा नहीं किया गया।

क्या है कर्मचारियों की मांग?

डीएमआरसी कर्मचारी यूनियन के महासचिव महावीर प्रसाद के मुताबिक लोग पिछले 10 साल से एक ही पे ग्रेड पर काम कर रहे हैं। जबकि इससे पहले हर पांच साल में प्रमोशन होता था। प्रबंधन ने वादा किया था कि 13,500-25,520 ग्रेड का 14,000-26,950 ग्रेड के साथ विलय किया जाएगा। लेकिन ये नहीं हुआ।

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