दिल्ली में बीच सड़क पर कांवड़ियों की गुंडागर्दी, कार में की तोड़फोड़ और पुलिस देखती रही

दिल्ली: दिलदार वाली दिल्ली में दानव आज सड़क पर निकले हैं। जगह मोतीनगर है शरीर पर भक्ति को चोला है और दिल में नफरत का बसेरा है। भक्ति की भाषा में इस वेशभूसा वाले को कांवड़िया कहा जाता है। ये भी कांवड़िया हैं। भक्ति का जल लेकर अपने आराध्य़ भोले की कृपा हासिल करने इसी सड़क से गुजर रहे थे। दिल के कड़वाहट वाले मोहल्ले से इनके कानों तक आवाज आई कि भक्ति छोड़ो गुंडई करते हैं। उन्मादी आवाज भक्ति पर भारी पड़ गई और एक निर्जीव कार पर दानवों का हमला हो गया।

जिस निर्जीव कार पर कांवड़ियों का क्रोध शक्ति प्रदर्शन का सर्टिफिकेट साबित हो रहा था उसी कार के भीतर दो जिंदा इंसान भी थे जिन्होंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई। पुलिस बताती है सड़क से गुजर रहे किसी कांवड़िये से कार सट गई। बात मामूली थी लेकिन भक्ति के नाम पर गुंडागर्दी का प्रदर्शन कर खुद को शक्तिशाली साबित करना था इसलिए कार पर टूट पड़े ढकोसलों के ये दानव।

शुरुआत एक ने की फिर दूसरा आया, फिर तीसरा आया अब गिनती करना बेकार है कहे देता हुं गुंडों का पूरा झुंड आ गया इस कार को तोड़ने के लिए। बगल से हौले हौले कोतवाल का भी प्रवेश हुआ। लेकिन आज कोतवाल की चाल भी मद्धम है। दिल्ली के मोतीनगर में दुर्योधन का दरबार सजा है। जिसमें कार एक द्रौपदी है और दर्जनों दुशासन उसका चीर हरण कर रहे हैं। कोतवाल भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे हैं, जो विविश होकर केवल इस चीरहरण का गवाह बन रहे हैं।

वर्दी बदनाम तो दशकों से रही है, रील से रीयल लाइफ तक। लेकिन आज कायरता की पराकास्ठा को भी उसने पार कर दिया। जिसके सामने गुंडों ने खुद को बलवान साबित कर दिया और अपनी चुस्ती पर इठलाने वाली दिल्ली पुलिस आपके साथ, आपके लिए सदैव के अपने नारे पर कुपोषण का पर्दा डाल दिया। कुपोषण ही तो है ये… सिस्टम का कुपोषण …इच्छाशक्ति का कुपोषण… जिम्मेदारी के एहसास का कुपोषण और खुद को कलंकित कर कानून को बेहयाई के साथ नीलाम करनेवालों का पहरेदार बनने वाली दिल्ली पुलिस के दामन पर मोती नगर की सड़क पर हुए इस चीरहरण के बाद कलंक का जो दाग लगा है उसे साफ कर पाना नमुमकिन होगा।

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