बुराड़ी खुदकुशी: महिला तांत्रिक गीता माता गिरफ्तार, 10 स्टूल ले गई पुलिस

नई दिल्ली:  बुराड़ी में खुदकुशी और मर्डर मामले में पुलिस ने महिला तांत्रिक गीता माता को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक महिला तांत्रिक गीता माता भूत प्रेत भगाने का दावा करती हैं। चुकी जिन 11 लोगों रहस्यमय मौत बुराड़ी के घर में हुई थी उनके बारे में अभी तक ये साफ नहीं है कि उन्होंने खुदकुशी किसके कहने पर की या पूरा परिवार इस तरह का कदम उठाने के लिए कैसे सहमत हो गया।

इस बीच दिल्ली पुलिस घर से वो 10 स्टूल अपने साथ लेकर गई जिसपर खड़े होकर इन्होंने खुदकुशी की थी। सीसीटीवी से मिले फुटेज में भी साफ दिख रहा है कि परिवार के सदस्य रात के वक्त पास के दुकान से स्टूल खरीद कर लाए थे। इसके अलावे कई और भी दिन के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। जिसके आधार पर बताया जा रहा है कि परिवार तकरीबन पांच-छ दिनों से इस तरह के खौफनाक कदम उठाने की तैयारी कर रहा था।

अबतक इस मामले में 11 मौत की तफ्तीश के लिए पुलिस पूरे घर को खंगाल चुकी है। घर से मिले रजिस्टर में जो बातें लिखी गई हैं उससे यही पता चलता है कि परिवार ने आत्मा और मोक्ष के चक्कर में पड़कर ये कदम उठाया। 10 साल पहले मर चुके पिता का भी जिक्र है। जिनके बारे में कहा गया है कि उन्होंने कहा था वो पांच आत्माओं की मुक्ति के लिए अनुष्ठान करें। अगर वो ऐसा करते हैं तो उन आत्माओं को भी मुक्ति मिलेगी जो उनके (स्वर्गीय पिताजी) साथ ही रहते हैं।

साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी से सुलझेगी मिस्ट्री?

वहीं इस केस की गुत्थी सुलझाने के लिए अब साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की मदद लेने की तैयारी भी चल रही है। इसके जरिये मृत लोगों के दिमाग को पढ़ा जाता है। मृत सभी लोगों का पोस्टमार्टम हो चुका है और उनकी रिपोर्ट भी जल्द आ जाएगी। अगर ये खुदकुशी का केस होता है तो इसमें साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी काफी मददगार साबित हो सकता है।

इसमें खुदकुशी करनेवाले आदमी के दिमाग में आखिरी वक्त में चल रही गतिविधि को पढ़ने की कोशिश की जाती है। ये भी पता लगाया जाता है कि मृतक का बैकग्राउंड क्या था। मौत से पहले उसका व्यवहार कैसा रहा। किन लोगों से उसने बात की। मरनवाला किस तरह के माहौल में रहता था। इससे ये भी पता चलता है कि क्या मरनेवाला किसी तनाव से जूझ रहा था।

साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी से जो बातें पता चलती हैं और मृतक के द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट या किसी परिस्थिजन्य साक्ष्य के मिलान के बाद काफी हद तक गुत्थी सुलझाई जाती है। लेकिन इसमें मौत की वजह समझने की गुंजाइश 50 फीसदी रहती है।

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