DARJEELING BANDH

अलग गोरखालैंड की मांग पर दार्जिलिंग में हिंसा, अर्धसैनिक बल के 600 जवान तैनात

अलग गोरखालैंड की मांग पर दार्जिलिंग में हिंसा, अर्धसैनिक बल के 600 जवान तैनात

नई दिल्ली:  स्कूल के सिलेबस में बांग्ला भाषा को अनिवार्य करन के बाद जिस दार्जिलिंग में स्थिति विस्फोटक हो गई अब वहां अलग गोरखालैंड की मांग होने लगी है। अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर जीजेएम की तरफ से अनिश्चितकालीन बंद का एलान किया गया है। पर्यटकों से दार्जिलिंग से चले जाने को कहा गया है। दुकानें सड़कें सब बंद हैं। और पैरा मिलिट्री के जवान हालात सामान्य बनाने के लिए गश्त कर रहे हैं।

सिलेबस में बांग्ला भाषा को अनिवार्य करने के बाद जब दार्जिलिंग में इसका विरोध शुरु हुआ तो सीएम ममता बनर्जी ने साफ किया था कि पहाड़ी इलाकों के लिए बांग्ला वैकल्पिक विषय रहेगा। लेकिन ममता के इस बयान का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि चिंगारी शोला बन चुकी थी। बात स्कूल की किताब से निकलर सड़कों पर पहुंच चुकी थी और अब मांग अलग गोरखालैंड की हो रही है।

जीजेएम ने दार्जिलिंग में अनिश्चितकालीन बंद बुलाया है। जिसके दूसरे दिन कई जगहों पर पथराव की घटना भी हुई। जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से इस मामले पर पूरी रिपोर्ट मांगी है। पश्चिम बंगाल सरकार की मदद और हालात सामान्य करने के लिए अर्धसैनिक बलों के 600 जवानों को दार्जिलिंग भेजा गया है।

दार्जिलिंग बंद के दूसरे दिन गोरखालैंड समर्थकों ने कई सरकारी कार्यालय बंद करवाने की कोशिश की। जब उन्हें ऐसा करने से रोका गया तो उन्होंने कई जगहों पर पत्थरबाजी की। जीजेएम के महासचिव रोशन गिरी ने कहा पुलिस ने शांतिपूर्ण रैली पर लाठीचार्ज किया है। हमारे खिलाफ जितना अधिक बल का प्रयोग होगा अलग गोरखालैंड राज्य के लिए संघर्ष उतना ही तेज होगा।

वहीं जीजेएम प्रमुख बिमल गुरुंग ने कहा कि वो केंद्र सरकार के संपर्क में हैं और उम्मीद है सहयोगी बीजेपी अलग गोरखालैंड की उनकी मांग पर विचार करेगी।

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