2 साल में कच्चे तेल कीमत 26 डॉलर घटी लेकिन पेट्रोल के दाम 16 रुपये बढ़ गए!




नई दिल्ली: लोग अक्सर ये चर्चा करते सुने जाते हैं कि जब कच्चे तेल की कीमत घट रही है तो फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ क्यों रहे हैं। पिछले 25 महीने के आंकड़ों पर गौर करने पर ये बात साफ हो जाती है कि पेट्रोल और डीजल से सरकार की कमाई तो हुई लेकिन जनता पर महंगाई की मार पड़ी।

नवंबर 2014 में इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब थी। लेकिन दिल्ली में इसी दौरान पेट्रोल की कीमत 64.24 रु/लीटर था। अगर बात मौजूदा वक्त की करें तो जनवरी 2017 में कच्चे तेल की कीमत 54.41 डॉलर/बैरल है जबकि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.60 रु./ लीटर है।

अगर बिना टैक्स और वैट के कीमत की बात करें तो पेट्रोल की कीमत 31.54 रु./ लीटर और डीजल 30.34 रु./लीटर है। नवंबर 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.20 रुपये थी। जो जनवरी 2017 में बढ़कर 21.48 रुपये हो चुकी है। वहीं नवंबर में डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये थी जो जनवरी 2017 में बढ़कर 17.33 रुपये हो चुकी है।

यानि पिछले 25 महीनों में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 12.28 रुपये और डीजल पर 13.87 रुपये बढ़ी है। यानि 2014 के मुकाबले 2017 में एक्साइज ड्यूटी दोगुनी जबकि डीजल पर पांच गुना बढ़ चुकी है। एक्साइज ड्यूटी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 2015 में हुई।

यही वजह है कि कच्चा तेल तो सस्ता हुआ लेकिन उसका फायदा जनता को नहीं मिला। पेट्रोल पर यदि ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन छोड़ दिया जाए तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 31.54 रुपये/ लीटर और डीजल 30.34 रुपये/ लीटर हो जाएगी। लेकिन ये संभव होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा। क्योंकि इसके लिए सरकार और डीलर को अपनी कमाई में कटौती करनी होगी।

पेट्रोल और डीजल पर वैट से होनेवाली कमाई पर राज्य सरकार का अधिकार होता है। अलग अलग राज्यों में वैट की दर अलग अलग है। अनुमान के मुताबिक अभी पेट्रोल पर वैट तकरीबन 27 फीसदी और डीजल पर वैट 16.75 फीसदी तक है। वैट पर 25 पैसे पॉल्यूशन सरचार्ज देना होता है। वैट का कैलकुलेशन पेट्रोल-डीजल की कीमत और एक्साइज ड्यूटी के आधार पर किया जाता है। इसलिए सभी राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमत भी अलग अलग होती है।

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