यूपी में फसल बर्बादी के मुआवजे में करोड़ों का घोटाला !

उत्तर प्रदेश/ संभल: ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल पर केंद्र सरकार की तरफ से यूपी के किसानों के लिए मुआवजे का एलान किया गया। दिल्ली से मुआवजे की रकम यूपी के लिए रवाना भी कर दिया गया । रकम यूपी पहुंच भी गई, चेक भी तैयार हो गया लेकिन जब सरकारी मुआवजे वाला चेक कैश में तब्दील हुआ तो किसान खाली हाथ रह गए और घोटालेबाजों की तिजोरी मालामाल हो गई। बात 2014-15 की हो रही है।

किसानों को मुआवजा चेक के जरिये मिलना था। लेकिन संभल का रहनेवाला किशन कुमार फर्जीवाड़ा कर 273 एकाउंटपेई चेक के करोड़ों रुपये अपने खजाने में जमा कर लिये। इसमें आपदा राहत विभाग के कर्मचारियों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड किशन यादव को माना जा रहा है। जो किसानों को मिलने वाले पैसों को संभल के व्यापारियों के एकाउंट में जमा करवा देता था। और इसके बदले किशन संभल के व्यापारियों से अपनी सुविधानुसार सामान उधार लेता था। मामले का खुलासा होने के बाद बदायूं के बिल्सी के एसडीएम ने संभल के 14 व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। वहीं संभल के व्यापारी मास्टरमाइंड किशन यादव के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

सरकारी राहत के 2 करोड़ रुपये के घोटाले का मास्टरमाइंड किशन यादव यूपी के संभल का रहनेवाला है। करोड़ों रुपये के इस घोटाले में सरकारी अफसर, बैंक कर्मी, लेखपाल और व्यापारी के मिली भगत की भी आशंका जताई जा रही है। किशन ने एक साल पहले जारी हुए आपदा राहत चेक में गलत तरीके से तारीख, नाम और धनराशि बदलकर दिल्ली से लेकर संभल तक के बैंक मैनेजरों से साठगांठ कर सरकारी पैसों को किसानों के खातों की जगह अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर करवा देता था।

इस मानले का खुलात तब हुआ जब ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों की किसानों ने आला अधिकारोयों से राहत राशि के चेक देने की मांग की। आला अधिकारियों ने जब मामले की जांच की तो इस फर्जीवाड़े का पता चला। जिसके बाद एसडीएम ने थाना बिल्सी में 14 लोगों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराया ।

सरकारी मदद के पैसों में फर्जीवाड़े का खेल केवल संभल में ही नहीं खेला गया। बल्की बदायूं में भी ये खेल खेला गया। बदायूं में किसानों के बीच बांटने के लिए 6 करोड़ से ज्यादा रुपया आया था। तहसील प्रशासन ने 8 हजार से ज्यादा लोगों के बीच मुआवजे का चेक बांट भी दिया. चेक की राशि 750 से लेकर 4500 रुपये के बीच था। लेकिन तहसीलदार बालक राम ने जब जून 2016 में अपने एकाउंट का स्टेटमेंट मंगाया तो उसमें पता चला कि कई चेक का भुगतान 4500 रुपये से काफी ज्यादा हुआ है। जांच पड़ताल में 273 चेक ऐसे पाए गए जिनसे गलत तरीके से पैसे निकाले गए थे। ये चेक उनलोगों के नाम जारी किये गए थे जिनके नाम लिस्ट में थे ही नहीं। 36 करोड़ के इस गड़बड़ी की भी जांच की जा रही है।
-Damage to crops in UP 2016

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