महामारी का ‘मुकुट’: हिम्मत न हारें, हम लड़ेंगे और जीतेंगे

WRITEN BY: ARTI

नई दिल्ली:  कोरोना का अर्थ यूँ तो लातीनी भाषा में मुकुट होता है क्योंकि इस वायरस के चारों ओर कॉटा निकला होता है, लेकिन ना चाहते हुए भी ये मुकुट आज लाखों लोगों के सर पर सज गया है.. जिसके कारण इस महामारी में सभी लोग अपने-अपने घरों में कैद होने पर मजबूर हो गए है..ऐसा लगता है जैसे सारी दुनिया थम सी गई है, जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग चुका है.. एक अदृश्य जीवाणु जिसने पूरे विश्व को खतरे में ला दिया है, वो डर बनकर सबके दिलों में बैठ गया है, चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है, भगदड़ जैसी स्थिति है सभी हैरान, परेशान है, सारे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च बंद हो चुंके हैं और ऐसी स्थिति में सबके घर ही पूजा-पाठ, अराधना के केंद्र बन चुके हैं।

ऐसी स्थिति में हिम्मत हारने से कुछ नहीं होगा घर पर रहकर ही सारी मानवता को बचाने के लिए प्रार्थना करनी होगी, हिम्मत हारने से कुछ हासिल नहीं होगा। इस वायरस से हमें लड़ना होगा और जीतना भी होगा। बस धैर्य और साहस बनाकर एकजुटता से एक दूसरे को मदद करते हुए इस वैश्विक विकटता को मात देनी होगी। आज चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए असंख्य लोगों को हृदय से धन्यवाद देने का वक्त है जो किसी देवदूत की तरह हमारी जीवन को बचाने में दिन-रात लगे हुए हैं और हमारे दुख और तकलीफ को कम कर रहे हैं।

इस कठिन विपत्ति में भगवान के दरवाजे भी बंद हो चुके हैं और इन विकट परिस्थितियों में किसी फरिश्ते की तरह हमारी सेवा कर रहे हैं। आज सभी लोगों को ये प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि वो जीवन में कभी किसी डॉक्टर या नर्स या चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े किसी भी व्यक्ति का कभी भी अपमान नहीं करेंगे।
इस संकट काल में जब हम घर में बंद हैं,तो सारे पशु, पक्षी, खुशी से हंस रहे हैं खिलखिला रहे हैं और अपनी आजादी का जश्न मना रहे हैं। क्योंकि हवा बिलकुल स्वच्छ और निर्मल हो गई, सारी सड़के शान्त हैं, कहीं भी गाड़ी सवारी का शोर नहीं, चारों ओर एक अनोखा शांति का माहौल है और ये मौन बेजुबान इंसानों के लिए जश्न मनाने का संयोग बन कर उभरा है।


ऐसी कठिन स्थिति में हमें निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐसा नहीं है कि पहले मानव सभ्यता के इतिहास में किसी वायरस या विषाणु का हम सामना नहीं किए है।  भूतकाल में भी हम बहुत सारी महामारी का सामना कर चुके हैं और समय आने पर सबकी दवा और टीका का अविष्कार भी किया गया  और हम उबर भी आए हैं।

चाहे वो प्लेग हो या स्वाइन फ्लु या मलेरिया या पोलियो इस वायरस की भी दवा का इजाद होगा लेकिन तब तक हमें संयम और धैर्य से रहकर एकाकी जीवन बिताना होगा ताकि हम कोरोना रूपी जंग में जीत हासिल की जा सकें। हम जीतेंगे सारी मानवता जीतेगी, दृढ राजनीतिक इच्छा शक्ति, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े असंख्य लोगों का समर्पण और करोड़ों लोगों की प्रार्थना जरूर रंग लाएगी और हम जीतेंगे।

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