Karachi-Literature-Festival-2017

कराची लिटरेचर फेस्टिवल में सरकारी खर्च पर भेजे गए भारतीय लेखक, बढ़ा विवाद

कराची लिटरेचर फेस्टिवल में सरकारी खर्च पर भेजे गए भारतीय लेखक, बढ़ा विवाद




नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ रिश्ते को लेकर एक बार फिर भारत सरकार असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रही है। इसके पीछे वजह ये है कि कराची लिटरेचर फेस्टिवल में ICCR की तरफ से चार भारतीय लेखकों को शामिल होने के लिए भेजा गया। कहने का मतलब ये है कि इन चारों लेखकों के आने जाने का पूरा खर्चा भारत सरकार उठाएगी। इसी पर विवाद हो रहा है। और कांग्रेस सरकार से जवाब मांग रही है।

विवाद इसलिए है क्योंकि उरी में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार की तरफ से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग थलग करने की नीति अपनाई गई थी। सरकार ने साफ संदेश दिया था कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते को आगे बढ़ाने पर दोबारा सोचा जाएगा। यहां तक कि सार्क स्मेलन में भारत ने जाने से इनका कर दिया था। जिसके बाद दूसरे सार्क देशों ने भी भारत का साथ दिया था। नतीजा ये हुआ था कि पाकिस्तान को सार्क सम्मेलन रद्द करना पड़ा था।

उरी हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय सैनिकों ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक किया था। कई आतंकी मारे गए थे और कई लॉन्चिंग पैड को तबाह किया गया था। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की इस कोशिश की सराहना की गई थी। लेकिन कराची लिटरेचर फेस्टिवल में सरकारी खर्च पर चार लेखकों को भेजकर मोदी सरकार सवालों में घिर गई है।

कांग्रेस पूछ रही है कि आखिर पाकिस्तान ने ऐसा क्या सुधार कर लिया या ऐसा कौन सा आश्वासन दे दिया कि ICCR की तरफ से सरकारी खर्च पर भारतीय लेखकों को कराची लिटरेचर फेस्टिवल में भेज दिया। यही वजह है कि कांग्रेस केंद्र सरकार को विदेश नीति के मुद्दे पर घेर रही है। और कह रही है कि केंद्र सरकार पाकिस्तान के साथ रिश्तों को लेकर समंजस की स्थिति में है।

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