पंजाब से बादल का सफाया, कैप्टन के हाथ में कमान, AAP के अरमान पर फिरा झाड़ू




नई दिल्ली: घोर निराशा के बीच पंजाब से कांग्रेस के लिए खुशी की खबर आई। पंजाब की कुल 117 सीटों में से कांग्रेस ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की। अकाली-बीजेपी गठबंधन को 18 सीट जबकि पहली बार पंजाब में चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी को 22 सीट मिली।

पंजाब की जनता ने एक तरफ जहां लगातार दो बार से पंजाब की सत्ता पर काबिज रहे बादल का पूरी तरह सफाया कर दिया वहीं आम आदमी पार्टी के दावों को हल्का साबित कर दिया। हलांकि आम आदमी पर्टी को इतनी सीट जरुर मिल गई जिससे कि वो दूसरे नंबर पर रही। लेकिन AAP के उन हसरतों पर ब्रेक लग गया जिसमें पार्टी ने पंजाब में सरकार बनाने का दावा किया था।

लेकिन राजनीतिक जानकार पंजाब में हुई जीत को कांग्रेस से ज्यादा कैप्टन अमरिंदर सिंह की जीत मान रहे हैं। ठीक उसी तरह से जैसे यूपी में बीजेपी से ज्यादा मोदी की जीत हुई। पंजाब में कैप्टन की जीत की खास बात ये है कि वहां कांग्रेस के किसी केंद्रीय नेता ने प्रचार नहीं किया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद ही प्रचार की कमान थामी थी। और अपने बलबूते पर पंजाब की सत्ता से बादल के बेदखल कर दो तिहाई बहुमत से सत्ता पर काबिज हुए। कांग्रेस की ये जीत बड़ी है।

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जहां यूपी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी वहीं पंजाब में उनकी एक भी सभा नहीं हुई। यहां तक की राज्य में जो कांग्रेस के पोस्टर लगे थे उनमें भी राहुल गांधी नजर नहीं आए। कैप्टन ने एक तरफ जहां बाजवा के साथ अपने मतभेदों से लड़ाई लड़ी वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक विरोधियों की चाल को मात दी।

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