कांग्रेस को सर्जरी की जरुरत, हार पर एक्शन जरुरी- @दिग्विजय @ थरुर

कांग्रेस को सर्जरी की जरुरत, हार पर एक्शन जरुरी- @दिग्विजय @ थरुर

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार के बाद विश्लेषण इस बात का हो रहा है कि इस हार की जिम्मेदारी किसकी है। जाहिर है पार्टी जब कोई चुनाव लड़ती है तो उसमें किसी एक की ही भूमिका नहीं होती है। कई स्तरों पर चुनाव की तैयारी की जाती है और चुनाव लड़े जाते हैं। कांग्रेस के साथ भी वही बात है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेता दिग्वजय सिंह ने बयान दिया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को सर्जरी की जरुरत है। आगे उन्होंने कहा की सोनिया गांधी उनकी सर्जन हैं इसलिए सर्जरी भी वही करेंगी। लेकिन दिग्विजय सिंह ने ये ईशारा भी कर दिया कि अगर प्रियंका गांधी पार्टी ज्वाइन करती हैं तो उन्हें खुशी होगी।

दिग्विजय सिंह की बात एक साथ कई दिशाओं में ईशारा करती है। एक तो ये की कांग्रेस बीमार हो चुकी है। दूसरी ये की पार्टी में ऊपरी स्तर पर काबिज नेताओं में कुछ बदलाव लाया जाए। शायद इसी मंशा की वजह से उन्होंने प्रियंका गांधी का नाम लिया। तीसरा ये की दिग्विजय सिंह बदलाव तो चाहते हैं लेकिन सोनिया गांधी के ही नेतृत्व में।

केवल दिग्विजय सिंह ही नहीं हैं जो ये मानते हैं कि पार्टी में बदलाव की जरुरत है। सांसद शशि थरुर भी मानते हैं कि हार पर एक्शन की जरुरत है। हलांकी एक्शन किसपर लिया जाएगा, कौन लेगा, किस तरह का एक्शन लिया जाएगा इस बारे में कोई भी कुछ बोलने से बच रहा है।

दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि हार पर केवल नेतृत्व जिम्मेदार नहीं। हार की जिम्मेदारी सभी की है। दरअसल यहां कांग्रेस पशोपेश में है। जहां पार्टी के नेता हार में सभी को सहभागी मान रहे हैं लेकिन गांधी परिवार को इससे अलग रखना चाहते हैं। क्या पार्टी के नेता बगैर कुछ कहे उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ इशारा कर रहे हैं ? क्योंकि राहुल जबसे पार्टी में सक्रिय हुए हैं तब से लेकर अबतक कांग्रेस कोई असाधारण प्रदर्शन नहीं दिखा पाई है। बल्की उसमे गिरावट ही आई है। अब पश्चिम बंगाल के चुनाव को ही ले लीजिये। जहां टीएमसी से मुकाबला करने के लिए पार्टी को वामदलों से हाथ मिलाना पड़ा। जबकी केरल में वही कांग्रेस वामदल के खिलाफ लड़ी। यहां कांग्रेस पार्टी के भीरत रणनीतिक सोच रखनेवालों पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ही पार्टी को कहीं दोस्त कहीं विरोधी बताकर कांग्रेस ने खुद ही अपने आप को एक कनप्यूज पार्टी की कतार में खड़ा कर दिया है। जाहिर है जब पार्टी अपनी नीतियों को लेकर ही कंफ्यूज है तो फिर जनता तो शक की निगाह से देखेगी ही।

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