यूपी में नेता ढूंढ रहे नया ठिकाना, कांग्रेस, SP, BSP के 6 MLA BJP में शामिल

लखनऊ : यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल हैं। जनता भले ही सोच रही हो कि अभी चुनाव होने में कुछ वक्त बचा है। लेकिन नेता ऐसा कतई नहीं मानते। हर बीतने वाला दिन नेताओं से ये सवाल पूछ रहा है कि वो कितने तैयार हैं। अपनी उसी तैयारी का आकलन करने के बाद और तैयारी मुकल्लम करने के लिए नेता अपना पाला और पार्टी भी बदल रहे हैं।

यूपी में कांग्रेस, एसपी और बीएसपी से 6 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए। पुराने घर को छोड़कर नए घर में प्रवेश करने की इस रीति और नीति को देखकर और इसके बारे में जानकर कोई भी बता सकता है कि उस राज्य में निकट भविष्य में चुनाव होनेवाले हैं। गुरुवार को जिन विधायकों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की उनमें कांग्रेस के विजय दूबे, संजय प्रताप जायसवाल और माधुरी वर्मा शामिल हैं। बीएसपी से बालाप्रसाद अवस्थी, राजेश त्रिपाठी और समाजवादी पार्टी के शेर बहादुर शामिल हैं।

गुरुवार को दूसरे दलों से बीजेपी में शामिल हुए इन नेताओं की खेप में वो विधायक भी शामिल हैं जिनपर उनकी पुरानी पार्टी में दगाबाजी के दाग लग चुके हैं। एसपी और कांग्रेस के विधायकों पर राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप है। बीएसपी वाले विधायक का कहना है कि मायावती चुनाव में टिकट बेचती हैं। इसलिए पार्टी बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के मूल सिद्धांत से भटक गई है। यही वजह है कि उन्होंने बीएसपी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया।

बीएसपी के स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी बीएसपी इसलिए छोड़ी थी क्योंकि मायावती टिकट बेच रही थी। और मौर्य को ये मंजूर नहीं था। जबकि मायावती ने कहा था अगर मौर्य पार्टी नहीं छोड़ते को उन्हें पार्टी निकाल देती। कुछ इसी तरह की बातें गुरुवार को शामिल हुए विधायकों के बारे में भी सुनने को मिल रहा है। कहा जा रहा कि पार्टी में ये वैसे भी दरकिनार हो चुके थे। इसलिए इन्होंने अपना पाला बदल लिया।

अब सच्चाई चाहे जो हो। लेकिन इतना तय है कि लोकतंत्र में सभी को अपने लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश का अधिकार है। ये नेता भी उसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सभी असंतुष्टों को बीजेपी ही भा रही है। बुधवार को कांग्रेस और एसपी के चार विधायक बीएसपी में शामिल हुए थे। इससे ये पता चलता है कि पार्टी के सुरक्षित और असुरक्षित होने का मापदंड नेता की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। इसके लिए कोई सार्वजनिक पैमाना तैयार नहीं किया गया है। वैसे इस तरह का पैमाना तैयार किया भी नहीं जा सकता।

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