कांग्रेस के अच्छे दिन आ गए !

कांग्रेस के अच्छे दिन आ गए !

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से कांग्रेस जिस राहु काल से गुजर रही थी। अब उस राहु काल में थोड़ा परिवर्तन होता नजर आ रहा है। काल की गणना में अब कांग्रेस के लिए किसी मंगल की झलक दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में जिस तरह से राजनीतिक घटनाक्रम और उसके नतीजे सामने आए हैं उससे तो यही ईशारा हो रहा है।

ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब उत्तराखंड में कांग्रेस ने कानूनी लड़ाई के बाद जीत हासिल की। उस जीत से केंद्र सरकार के साथ साथ बीजेपी भी बैकफुट पर आ गई। उत्तराखंड के राजसिंहासन पर हरीश रावत का दोबारा राजतिलक हुआ। पहाड़ पर मिली उस जीत की खुशी में कांग्रेस अभी झूम ही रही थी कि अगली खुशी की खबर दिल्ली से आई।

इसबार दिल्ली के 13 MCD वार्डों में उपचुनाव हो रहा था। इस चुनाव में खास बात ये थी की आम आदमी पार्टी भी चुनावी मैदान में थी। इस पार्टी से चुनावी हार की याद अब भी देश की पुरानी और बड़ी पार्टियों को याद है।

इस उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए अच्छे दिन के संकेत से कम नहीं रहे। MCD उपचुनाव में कांग्रेस ने 4 सीटों पर जीत हासिल की। जबकी आम आदमी पार्टी ने सबसे ज्यादा 5 सीटों पर जीत हासिल की। बीजेपी को तीन सीट मिली। लेकिन जीत से AAP खुश नहीं है। सवाल उठता है कि आखिर क्यों ? दरअसल इसके पीछे वजह है AAP का घटा हुआ वोट प्रतिशत। विधानसभा चुनाव में इन इलाकों में आम आदमी पार्टि का वोट प्रतिशत 54% था जो इसबार घटकर 29.93 % पर आ गया। AAP  के वोट प्रतिशत में ये एक बड़ी गिरावट है। यहीं पर आम आदमी पार्टी की निराशा की वजह भी छिपी है। कांग्रेस जो विधानसभा चुनाव में कहीं दिखाई नहीं दे रही थी उसका वोट प्रतिशत 24.87% जबकी बीजेपी का वोट प्रतिशत 34.11% रहा।

यही वो आंकड़ा है जिसके वजह से आम आदमी पार्टी 5 सीट जीतकर भी नाखुश है, कांग्रेस 4 सीट जीतकर फाइनल मुकाबले की तैयारी कर रही है और बीजेपी 3 सीट जीतकर भी खुद को बड़ा विजेता बता रही है क्योंकि उसके वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है। एक खास बात और भी रही की भाटी वार्ड जहां से नर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र सिंह तंवर ने जीत हासिल की वहां पर आम आदमी पार्टी चौथे नंबर पर रही।

अब ये जान लेना भी जरुरी है कि अगर कांग्रेस शून्य से 4 तक पहुंची है तो इसका क्रेडिट किसे दिया जाना चाहिए। आपको याद होगा जब दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले अजय माकन को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन तब अजय माकन के पास चुनौती ज्यादा थी और वक्त कम। कांग्रेस अपना जनाधार पूरी तरह से खो चुकी थी। और कांग्रेस के वोट बैंक को आम आदमी पार्टी अपने पक्ष में कर चुकी थी। उस चुनाव के बाद दिल्ली में ये पहला चुनाव था जिसके नतीजे से ये संकेत निकलकर आए की कांग्रेस के भीतर अभी सांसें चल रही हैं, उसकी धड़कन बाकी है और बीमार कांग्रेस लगातार मजबूत हो रही है। जिस जनाधार को कांग्रेस खो चुकी थी माकन उस पुराने वोटबैंक का विश्वस हासिल करने में कामयाब हो रहे हैं।

2017 आने में अभी थोड़ा वक्त है। इसी थोड़े वक्त में कांग्रेस को बड़ी जीत की तैयारी करनी है। क्योंकि अभी कांग्रेस ने MCD के सेमीफाइनल में अपना प्रदर्शन सुधारा है। असली मुकाबला 2017 में होगा। जब पूरी दिल्ली में एमसीडी चुनाव होगा।

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