राजस्थान में वसुंधरा सरकार के बिल पर कांग्रेस का हमला, बीजेपी भी बंटी

नई दिल्ली:  राजस्थान में वसुंधरा सरकार के नए बिल पर विवाद गहराने लगा है। दरअसल इस बिल को राजस्थान के पूर्व और सरकारी बाबुओं को बचाने वाला विधेयक बताया जा रहा है जिसे आज विधानसभा में पेश किया गया। विधेयक के मुताबिक इनके खिलाफ कार्रवाई से पहले राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इसके पेश होते ही हंगामा शुरु हो गया। विधेयक के पेश होते ही कांग्रेसी विधायकों ने सदन से वॉक आउट किया। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस मामले पर बीजेपी के विधायक भी आपस में बंटे हुए हैं।

बीजेपी नेता घनश्याम तिवारी और एन रिजवी ने इस बिल का विरोध किया है। घनश्याम तिवारी ने कहा कि सीएम वसुंधरा राजे को बचाने के लिए इस तरह का विधेयक लाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सिएम सचिवालय के लोग भी मुश्किल में फंस सकते हैं इसलिए इस विधेयक के जरिये उन्हें बचाया जा रहा है।

इस विधेयक को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। जिसमें अध्यादेश को मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इसे समानता के साथ साथ निष्पक्ष जांच के अधिकार के खिलाफ बताया गया है। कहा गया है कि इससे एक बड़े तबके को अपराध का लाइसेंस दिया गया है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी इस बिल का विरोध किया है। गिल्ड ने इसे पत्रकारों को परेशान करने, सरकारी अधिकारियों के काले कारनामे छिपाने और भारतीय संविधान की तरफ से सुनिश्चित प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लागाने वाला घातक कानून बताया है।

इस विधेयक के विरोध में कांग्रेसी विधायकों में मुंह पर काली पट्टी बांधकर विरोध किया। राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि इस बिल को किसी हाल में पास नहीं होने देंगे। कांग्रेसी विधयाकों ने विधानसभा के बाहर भी प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथ में तख्ती ले रखी थी। जिसपर लिखा था काला कानून वापस लो।

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