यहां लोग पॉलिथीन के सहारे कर रहे हैं सर्दी से मुकाबला




गोड्डा/झारखंड: दिन तो आसमान से आनेवाली सूरज की रौशनी के सहारे कट जाता है। लेकिन शाम के बाद जब सूरज रौशनी ओझल हो जाती है और हवाओं की शीलतता ठिठुरन बढ़ाती है तो आग की तलाश होती है। इस वर्ग में वो लोग शामिल हैं जो या तो सड़क किनारे रात बिताते हैं या फिर दिनभर रिक्शा चलाने के बाद रात को चौराहे के किसी कोने को अपना ठिकाना बनाते हैं।

सर्द रात का मुकाबला करने और शरीर को ठंड से बचाने के लिए ये आग का सहारा लेते हैं। इनके जेब में इतने पैसे नहीं होते हैं कि ये लकड़ी खरीद कर उसे जलाएं मजबूरन सड़क किनारे से पॉलिथीन इकट्ठा कर उसे जलाकर ठंड से अपनी रक्षा करते हैं। इससे फौरी तौर पर ठंड से तो उनकी रक्षा हो जाती है लेकिन साथ ही बीमारी की सौगात उन्हें मिल जाती है।

पॉलिथीन जलाने पर उससे कई तरह की जहरीली गैस निकलती है। ये सब जानते हैं। लेकिन जान बचाने के लिए लोग मजबूरन ये जोखिम लेते हैं। ये हाल है गोड्डा शहर का। ग्रामीण इलाकों की कल्पना आप खुद कर सकते हैं। इनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से किसी तरह की सुविधा नहीं दी जा रही जिसकी वजह से मजबूरन उन्हें पॉलिथीन जलाकर आग सेंकना पड़ता है।

ये हाल गोड्डा के किसी एक चौक या चौराहे का नहीं है। शहर में अलग अलग जगहों पर रात के वक्त इस तरह का नजारा आम है। इसमें मासूम बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े तक शामिल होते हैं। दिन में तापमान भले ही थोड़ा ज्यादा रहता है लेकिन रात के वक्त ठिठुरन बढ़ जाती है। जिसमें अलाव जलाने के सिवाय इनके पास कोई दूसरा चारा नहीं होता है। और अलाव में आग जलती रहे इसके लिए पॉलिथीन के सिवाय कोई दूसरा चारा नहीं है।

इस तरह की विषम परिस्थिति में आमतौर पर उम्मीद की जाती है कि प्रशासन की तरफ से कोई इंतजाम किया जाएगा। लेकिन गोड्डा में ऐसा नहीं है। प्रशासन बुलाने के बाद भी इनतक नहीं पहुंच पाता है लेकिन मुसीबत बिन बुलाए इनतक पहुंच जाती है। जाहिर है प्रशासन को उस दिन का इंतजार होगा जब पॉलीथीन जलाने से होने वाले प्रदूषण से हालात विस्फोटक हो जाएगी। जो हाल आज दिल्ली समेत कई महानगरों का हो चुका है।

दिल्ली जैसे शहरों में तो एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा जलाने पर सख्त मनाही कर दी गई है। लेकिन गोड्डा में प्रशासन का जो रवैया है उससे यही संदेश जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को प्रशासन के साहेब पढ़े नहीं हैं।

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