CM योगी एक बहुत बड़ी गलती करने जा रहे हैं आखिर किसके दबाव में हैं आदित्यनाथ

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल से नेशनल और स्टेट हाईवे पर 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके पीछे वजह ये थी कि हाईवे पर हर घंटे 19 हादसे होते हैं। इनमें ज्यादातर हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से होते हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से कई लोगों की मौत की खबर भी सामने आती रहती है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर शराबबंदी का सीधा आदेश दिया था।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य सरकार उसी जगह पर शराब बेचने के लिए नया रास्ता अपना रही है। जिसमें यूपी की योगी सरकार भी शामिल है। बताया जा रहा है कि योगी सरकार उन हाइवे को डिनोटिफाई करने जा रही है जहां पर शराब के ठेके बने हुए हैं। ऐसा करने से सुप्रीम कोर्ट का आदेश उन ठेकों पर प्रभावी नहीं होगा। इसके लिए योगी सरकार अबतक हाईवे की श्रेणी में रही सड़कों को डिनोटिफाई कर उन्हें जिला सड़क का दर्जा दे देगी। और जहां बाइपास है उन बाइपास को हाईवे के तौर पर नोटिफाई किया जाएगा।

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ऐसा बदलाव करनेवाले योगी अकेले सीएम या यूपी अकेला राज्य नहीं है। बल्कि ऐसा करनेवालों में यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकार भी शामिल है।

योगी सरकार की तरफ से किये गए इस बदलाव के बाद तकरीबन 550 शराब की दुकानों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर नहीं पड़ेगा। महाराष्ट्र में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ इसी तरह की तैयारी की जा रही है। शराब की दुकानों को बचाने के लिए इस तरीके को पश्चिम बंगाल में भी अपनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला हाईवे से 500 मीटर की परिधि में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा है। इसलिए राज्य या राष्ट्रीय राजमार्गों को डिनोटिफाई करने से वहां शराब की बिक्री जारी रह सकेगी।

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