दुनिया के लिए बलात्कारी लेकिन सीएम खट्टर के लिए सम्मानित व्यक्ति है राम रहीम?

नई दिल्ली:  तीन साल पहले यानि साल 2014 में डेरा वाले बलात्कारी बाबा ने जो कृपा बरसाई थी बीजेपी पर उस एहसान के तले सीएम खट्टर दबे जा रहे हैं। इतने दब गए हैं कि बलात्कारी राम रहीम पर इतनी फजीहत होने के बाद भी उनके मुंह से बलात्कारी बाबा के लिए सम्मान के बोल ही निकल रहे हैं। सीएम खट्टर राम रहीम की पेशी और उसे सजा सुनाए जान के बाद पंचकूला में भड़की हिंसा पर सफाई देने आए थे।

इस सफाई देने में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने ये साफ कर दिया कि दुनिया और अदालत के लिए भले ही राम रहीम बलात्कारी, व्यभिचारी है लेकिन उनके मन में राम रहीम के लिए कोई मैल नहीं है। वो आज भी उनके लिए सम्मानित है और आज भी डेरा की गुफा में बलात्कार करने वाले उस ढोंगी पाखंडी में सीएम को संत दिखाई देता है।

सीएम खट्टर ने कहा ‘चीजों को समझना होता है। बाद में किसी घटना के होने पर पोस्टमार्टम तो कोई भी कर लेता है। ये बात ठीक है कि प्राथमिकता ये थी कि राम रहीम जी जो तारीख है उस पर वो आएं और आकर कोर्ट का निर्णय सुनें।‘

जिस बलात्कारी राम रहीम को खट्टर जी, राम रहीम जी कहकर संबोधित कर रहे हैं उसी ढोंगी को जब अदालत से सजा सुनाई गई तो पंचकूला से लेकर सिरसा तक आगजनी शुरु हो गई। सरकार से लेकर प्रशासन के हाथपांव फूल गए थे। नजारा कुछ ऐसा था कि लग रहा था हरियाणा में सरकार है ही नहीं । जो भी है वो केवल डेरा के गुंडे हैं और उनकी जो मर्जी होगी उसे करने की उन्हें खुली छूट दे दी गई है हरियाणा की खट्टर सरकार की तरफ से।

जिस प्राथमिकता की बात यहां पर सीएम खट्टर कर रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हरियाणा में राम रहीम का कद कितना बड़ा हो चुका था। जिसके सामने सरकार ये विनती कर रही थी कि माई बाप आप अदालत जरूर चले जाना। अगर नहीं जाओगे तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। खट्टर जी की ये बेचारगी इसलिए है क्योंकि 2015 में संत रामपाल के मामले में भी सरकार अंगद के पैर की तरह अपनी जगह पर जमी रही थी और तबतक अपनी जगह से नहीं हिली थी जबतक कि कोर्ट ने ये नहीं कह दिया कि रामपाल को पकड़कर अदालत में पेश करें। आदालत के इस आदेश से पहले तक तो सरकार रामपाल के आश्रम के बाहर हाथ जोड़कर खड़ी थी और भीतर रामपाल दूध से स्नान कर रहा था।

तब भी सीएम खट्टर ही थे। हलांकि रामपाल का प्रभाव बीजेपी सरकार पर उतना नहीं था जितना राम रहीम का । सरकार सोच रही थी अगर राम रहीम को उसके गुफा से निकालने की नौबत आई तो क्या होगा। क्योंकि राम रहीम के चरणों में तो पूरी खट्टर सरकार ही नतमस्तक हो चुकी है। अदालत से दोषी ठहराए जाने से एक दिन पहले तक हरियाणा सरकार के मंत्री रामबिलास शर्मा के लिए राम रहीम एक संत था और उसके गुंडे अहिंसा के पुजारी। 25 अगस्त को ये भ्रम दूर हो गया। लेकिन हैरानी इस बात की है कि सीएम खट्टर आज भी राम रहीम के आगे सजदा कर रहे हैं।

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