मंदसौर में मारे गए किसानों के परिजनों को 1 करोड़ मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी

नई दिल्ली:  मंदसौर में किसान और सरकार आमने सामने हैं। मंगलवार को हुई फायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई। किसानों का आरोप है कि गोली सीआरपीएफ के जवानों की तरफ से चलाई गई। सरकार कह रही है गोली असामाजिक तत्वों की तरफ से चलाई गई। जिसमें किसानों की मौत हुई। दोनों पक्षों के अपने दावे हैं। इन दो अलग अलग दावों के बीच मंदसौर में किसानों का प्रदर्शन दावा नल बन गया।

रेल की पटरियां उखाड़ दी गई, हाईवे जाम कर दिया गया, एक टोल नाके पर तोड़फोड़ की गई। हालात जब ज्यादा खराब होने लगे तो पुलिस हरकत में आई। इसी सरगर्मी के बीच गोलियां चलने की आवाज आई और पता चला उस गोली से पांच किसानों की मौत हो गई। गोली किसने चलाई इसपर सभी पक्षों के अपने अपने दावे हैं। मंदरौस जब सुलग उठा तो सरकार भोपाल में बैठी शिवराज सिंह की सरकार भी हरकत में आई।

गोलीकांड में मारे गए किसानों के परिजनों के लिए 10-10 लाख मुआवजे का एलान किया गया। लेकिन जब बात इतने से नहीं बनी और परिजनों का विरोध जारी रहा तो मुआवजे की राशी को बढ़ाकर दस गुना कर दिया गया। जिसके बाद मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपया मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया। मंगलवार को ही मंदसौर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। हालात काबू में जरूर आ गए लेकिन तनाव बरकरार है। इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है।

मंगलवार को रात भर भोपाल में हलचल तेज रही क्योंकि डर इस बात का था कि मंदसौर कहीं दोबारा सुलग न उठे। क्योंकि आग की पहली लपट की तपिश अभी भी महसूस की जा रही थी। ऐसे में अगर दूसरी बार अविश्वास और विरोध की लपटें उठने लगें तो हालात को संभालना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

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