गोवा #BRICS 2016 में आतंकवाद पर दिखी चीन की दोहरी नीति

दिल्ली: गोवा BRICS सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बगैर नाम लिये पाकिस्तान और चीन दोनों को ये बता दिया कि आतंकवाद में फर्क करना सही नहीं है। मोदी ने ये भी कहा था कि आतंकवाद को पालने वाला देश और उसे आर्थिक मदद देनेवाला भी उतना ही दोषी है। इसलिए आतंक को पनाह देने वाले देश की मदद करनेवाले पर भी कार्रवाई हो। पीएम मोदी के इस संदेश को सख्त माना जा रहा था। लेकिन BRICS सम्मेलन से जो उम्मीद लगाई गई थी वो पूरी नहीं हो सकी।

उम्मीद ये का जा रही थी कि सम्मेलन में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का जिक्र किया जाएगा। इसके साथ सीमापार आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया जाएगा। लेकिन ये दोनों चीजें नहीं हो सकीं। माना जा रहा है कि इसके पीछे चीन का अड़ियल रुख था। उसी की वजह से इन दोनों मुद्दों पर गोवा में हुए BRICS सम्मेलन में चर्चा नहीं हो सकी।

BRICS टीम की अगुवाई कर रहे अमर सिन्हा ने बताया कि भारत में आतंक का कारोबार कर रहे इन दोनों आतंकी संगठनों को घोषणापत्र में जगह नहीं दी गई। वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और जबात-अल-नुस्र का जिक्र घोषणापत्र में किया गया था। गोवा घोषणापत्र में सीमापार आतंकवाद के मुद्दे को जगह नहीं दी गई।

लेकिन ब्रिक्स के चारों सदस्य देशों रूस, दक्षिण अफ्रीका, चीन, ब्राजील ने उरी हमले की निंदा की। इन देशों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने पर सहमति जताई। लेकिन पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों पर चीन जो रुख अपना रहा है क्या उस हालात में ये संभव है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम को चीन का साथ मिल पाएगा ?

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