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चीन केवल चिल्लाएगा, भारत से टकराने की हिम्मत नहीं करेगा उसकी ये 5 वजह हैं

चीन केवल चिल्लाएगा, भारत से टकराने की हिम्मत नहीं करेगा उसकी ये 5 वजह हैं

नई दिल्ली:  सिक्कम को लेकर चीन लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। कभी समुद्र में पनडुब्बी की संख्या बढ़ा रहा है तो कभी युद्धाभ्यास किया जा रहा है। यही नहीं सिक्किम में चीनी सैनिक कभी भारतीय सैनिकों के बंकर तोड़ रहे हैं तो कभी कैलाश मानसरोवर यात्रा रोक रहे हैं। इन सारी हरकतों से चीन भारत पर दबाव बनाना चाह रहा है कि वो सिक्किम में अपनी सेना पीछे हटा ले ताकि चीन चीन बिना किसी विरोध के वहां सड़क का निर्माण कर सके।

भारत में चीनी राजदूत ने हाल ही में कहा है बातचीत की पहली शर्त ये है कि सिक्किम में भारत अपने सैनिकों को पीछे करे। उसके बाद ही किसी तरह की बात होगी। लेकिन चीन की इन धमकियों के जवाब में भारत ने भी कड़ा जबाव दिया है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली पहले ही कह चुके हैं कि 1962 और 2017 के भारत में काफी फर्क है। दरअसल चीन ने कहा था कि भारत 1962 के नतीजे को याद कर ले।

  1. विश्लेषण ये बताते हैं कि चीन धमकी तो देता रहेगा, दबाव बनाने की कोशिश भी करता रहेगा लेकिन वो भारत से सीधी टक्कर या युद्ध करने की गलती नहीं करेगा, क्योंकि अगर चीन भारत की तरफ युद्ध शुरु करता है या रिश्ते जरूरत से ज्यादा बिगाड़ता है तो इससे चीन पर बड़ी आर्थिक मार पड़ेगी।
  2. भारत चीनी सामानों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। दोनों देशों के बीच 2016-17 में तकरीबन 71.18 डॉलर का कारोबार हुआ। लेकिन चीन से उस आयात में थोड़ी कमी की गई है जिसके बाद अब चीन ने भारत को 59.43 अरब डॉलर के सामान का सालाना निर्यात करता है। ये भारत के कुल आयात का 13 फीसदी है। 2017 तक चीन ने भारत में 4.91 डॉलर का निवेश किया है। यानि साफ हालता ज्यादा बिगड़े तो चीन पर आर्थिक मार पड़ेगी।
  3. पिछले कुछ महीनों में भारत अमेरिका के बीच काफी करीबी बढ़ी है। हाल में डॉनल्ड के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों की करीबी एकबार फिर देखने को मिली। अमेरिका-भारत के बीच बनी ये नजदीकी चीन को खटक रहा है। चीन की तरफ से कहा भी गया था कि अमेरिका की वजह से ही भारत चीन को आंखें दिखा रहा है। चीनी कंपनियां अमेरिका में भी हैं। और ट्रंप प्रशासन अमेरिका फर्स्ट की नीति पर काम कर रहे हैं। यानि ट्रंप के लिए अमेरिका का हित सर्वोपरी है। ऐसे में अगर चीन भारत के साथ रिश्ता बिगाड़ता है ग्लोबल मार्केट में अपना सिक्का जमाने की चीन की कोशिश को धक्का लग सकता है।
  4. भारत में चीन की कई बड़ी कंपनियां अपना व्यापार कर रही हैं। ये कंपनियां अरबों का व्यापार हर साल भारतीय बाजार में करती हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। जिनमें ओप्पो, लिनोवो, हायर, ह्यूवाई, टीसीएल, वीबो जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

5.जिस 1962 का जिक्र चीन बार बार करता रहा है वहां ये कहना गलत नहीं होगा कि भारत 1962 से काफी आगे निकल चुका है। सैन्य दृष्टि से भी और आर्थिक, राजनीतिक दृष्टि से भी। एक आंकड़े के मुताबिक चीन के पास कुल 2955 एयरक्राफ्ट है। जबकि भारत के पास 676 फाइटर एयरक्राफ्ट है, 809 अटैक एयरक्राफ्ट है, 857 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है, 323 ट्रेनर एयरक्राफ्ट है और 16 अटैक हेलिकॉप्टर समेत कुल 666 हेलिकॉप्टर हैं।

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