नेहरु की लापरवाही से अक्साई चिन पर चीन ने कब्जा जमाया-CIA




नई दिल्ली: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की तरफ से कई गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किये गए हैं। उन्हीं दस्तावेजों में एक्साई चिन और 50 के दशक में भारत और चीन के बीच के अक्साई चिन का भी जिक्र है। CIA के दस्तावेज के मुताबिक अगर भारतीय हुकूमत CIA की चेतावनी पर गंभीरता दिखाती और सतर्क रहती तो अक्साई चिन आज भारत का हिस्सा होता।

CIA के दस्तावेज के मुताबिक 1953 में CIA को पता था कि चीन अपनी सीमा पर सैनिक और सड़क बानाने में इस्तेमाल होनेवाले निर्माण सामग्री इकट्ठा कर चुका था। 1957 में चीनी अखबार में शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाली 1200 किलोमीटर सड़क के बारे में खबर छपी। लेकिन उस वक्त भारत की तरफ से कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। तब भारत के प्रधानममंत्री जवाहर लाल नेहरू थे।

1958 में तत्कालीन विदेश सचिव ने जब पीएम नेहरू को चीन की सड़क के अक्साई चिन से होकर गुजरने की बात कही तो इसपर नेहरू की तरफ से ठंडी प्रतिक्रिया दी गई। नेहरू ने 1959 में संसद में ये स्वीकार किया कि ये सड़क भारत के अक्साइ चिन से होकर गुजरती है।

CIA की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी अखबार कुआंग-मिंग-जी-पाओ ने 6 अक्टूबर 1957 को खबर छापी कि दुनिया के सबसे ऊंचे हाईवे शिनजियांग-तिब्बत हाईवे का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। CIA की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद फ्रांसीसी मूल के तिब्बत विशेषज्ञ क्लार्ड अर्पी ने लिखा है अगर नेहरू प्रशासन समय रहते जाग जाता तो अक्साई चिन आज भी भारत के पास होता।

चीनी अखबार में 1957 में छपी खबर पर क्लाड का मानना है कि इस खबर को भारत पहुंचने में दो साल लग गए। इन दो सालों में आईबी के तत्कालीन निदेशक बीएन मलिक को इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि चीन ने अक्साई चिन में सड़क बना ली है। 1958 में भारत के विदेश सचिव सुबीमत दत्त ने पीएम नेहरू को बताया ऐसा लग रहा है कि चीन द्वारा बनाई गई 1200 किलोमीटर लंबी सड़क भारत के अक्साई चिन से होकर गुजर रही है।

दत्त के पत्र का जवाब देते हुए नेहरू ने अगले दिन अक्साई चिन में जमीन के निरीक्षण की अनुमति दे दी लेकिन साथ ही ये भी लिख दिया कि इससे कोई फायदा नहीं होगा। जब भारतीय सैनिक अक्साई चिन के जमीन के निरीक्षण के लिए गए तो कुछ लोगों को चीनी सैनिकों ने पक़ड़ लिया और कई को मार दिया।

क्लाड ने नेहरू पर संसद को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है। क्लाड के मुताबिक 22 अप्रैल 1959 को चीनी नक्शे में भारतीय इलाके को चीन का अंग दिखाने पर जब सांसद बृज राज सिंह ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से सवाल पूछा तो नेहरू का जवाब था मैं माननीय संसद सदस्य को सुझाव दूंगा कि कभी हांग कांग तो कभी कहीं और कभी कहीं की मीडिया में छपी रिपोर्ट पर ज्यादा ध्यान नहीं दें। क्लाड ने लिखा है कि अगस्त 1959 में नेहरू ने संसद में स्वीकार किया कि चीन ने भारत के अक्साई चिन में सड़क बना ली है। एक तरह से अक्साई चिन पर चीन की प्रभुसत्ता को नेहरू ने मौन स्वीकृति दे दी थी।

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