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NSG सदस्यता के लिए चीन का समर्थन हासिल करने की MODI की कोशिश नाकाम

NSG सदस्यता के लिए चीन का समर्थन हासिल करने की MODI की कोशिश नाकाम

NSG की सदस्यता पाने के लिए चीन का समर्थन जुटाने की सारी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। चीन ने साफतौर पर कह दिया है कि सोल में होनेवाली NSG समूह के 48 देशों की बैठक में भारत की सदस्यता का मुद्दा एजेंडे में नहीं है। चीन ने कहा NSGके सदस्य देश अभी इस मुद्दे पर एकमत नहीं हैं। ऐसे में आगामी बैठक के दौरान समूह में किसी नए देश की एंट्री पर बातचीत बचकानी बात होगी।‘ 24 जून को NSG के सदस्य देशों की बैठक सोल में होनी है। चीन की तरफ से ये रुख तब अपनाया गया है जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक दिन पहले ही कहा था कि NSG में भारत की एंट्री पर चीन की चिंता उसकी प्रिक्रिया को लेकर है।

NSG परमाणु मुद्दों से जुड़े अहम मसलों को देखता है। इसके 48 सदस्य देशों को परमाणु प्रौद्योगिकी के व्यापार और उसके निर्यात की इजाजत होती है। NSG अपने सदस्य देशों के सर्वसम्मति के सिद्धांत के तहत काम करता है और भारत के खिलाफ एक भी देश का वोट दावेदारी को कमजोर बनाता है।

चीन NSG में भारत की एंट्री का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि भारत ने NPT यानि परमाणु अप्रसार संधि पर अबतक हस्ताक्षर नहीं किया है। चीन भी लगातार यही मुद्दा उठाता रहा है कि बगैर NPT पर दस्तखत किये किसी देश को NSG का सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। NSG का गठन 1974 में तब किया गया था जब भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया था। इसका मकसद है दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जाए। हलांकी NSG में सदस्यता के लिए अमेरिका, रूस,न्यूजीलैंड, ब्रिटेन की तरफ से भारत को पूरा सहयोग देने की बात कही गई थी। लेकिन चीन के इस नए रुख के बाद अब NSG का सदस्य बनने का रास्ता एकबार फिर मुश्किल हो गया है।

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