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NSG में भारत की एंट्री में चीन अब भी है सबसे बड़ी रुकावट

NSG में भारत की एंट्री में चीन अब भी है सबसे बड़ी रुकावट

नई दिल्ली: विएना में होने जा रही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानि एनएसजी की बैठक में इसबार भी चीन भारत की सदस्यता के खिलाफ बोलेगा। हाल में चीन की तरफ से दिये गए बयान में ये साफ किया गया है कि एनएसजी में भारत की एंट्री को लेकर चीन के पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा शुक्रवार को विएना में एनएसजी के पूर्ण सत्र का आयोजन होगा। फिलहाल हमारे रुख में कोई परिवर्तन नहीं है। 4 नवंबर को हैदराबाद में हुई बैठक का जिक्र करते हुए लू ने कहा कि चीन भारत सहित संबंधित पक्षों के साथ नजदीकी संपर्क में है और इस मुद्दे पर रचनात्मक बातचीत और कोऑर्डिनेट कर रहा है।

दरअसल हैदराबाद में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी स्टेट काउंसलर यांज जिएची के बीच बातचीत हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस बैठक में समूह उन नए सदस्यों को शामिल करने के दो चरणों की प्रिक्रिया पर चर्चा कर सकता है। जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है।

चीन ने हाल ही में कहा था कि वह पहले उन सभी देशों को शामिल करने पर एक हल का प्रयास करेगा, जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है। उसके बाद भारत के विशिष्ट आवेदन पर चर्चा करेगा। चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था एनएसजी में भारत के शामिल होने पर मैं आपको कह सकती हूं कि चीन का रुख बहुत ही स्पष्ट और पहले वाला ही है।

चायनिंग ने अपने बयान में कहा था हम ऐसा हल निकालने की कोशिश करेंगे जो सभी गैर एनपीटी देशों पर लागू हो और उसके बाद हम संबंधित गैर एनपीटी देश के विशिष्ट आवेदन पर चर्चा करेंगे।

दरअसल चीन चाहता है कि अगर भारत को एनएसजी में एंट्री दी जा सकती है तो फिर पाकिस्तान को क्यों नहीं। पाकिस्तान ने भी एनएसजी में सदस्यता के लिए आवेदन कर रखा है। भारत और पाकिस्तान दोनों में से किसी ने एनपीटी पर दस्तखत नहीं किये हैं। लेकिन पाकिस्तन के उलट भारत के परमाणु अप्रसार के रिकॉर्ड को एनएसजी के ज्यादातर सदस्य सकारात्मक मानते हैं।

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