छठ पूजा के बारे में ये 10 बातें हैं बेहद ही खास

नई दिल्ली:  दिवाली के बाद से ही छठ की शुरुआत हो जाती है। छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार में मनाया जाता है। लेकिन अब इसे यूपी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मुंबई से लेकर कई और राज्यों में भी मनाया जे लगा है। छठ पर्व में सबसे ज्यादा ध्यान स्वच्छता और साफ सफाई का रखा जाता है।

छठ पर्व एक मात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। पहले दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और उसके अगले दिन सूर्योदय के वक्त सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

इस पर्व को छठ व्रति अपने पूरे परिवार के साथ मनाते हैं। इस पर्व में किसी पंडित की जरूरत नहीं होती है।

छठ चार दिनों का त्योहार होता है। पहले दिन नहाय खाय होता है। इस दिन खाने में कद्दू (लौकी) का प्रयोग आनिवार्य माना जाता है। महापर्व के इस पहले दिन को कद्दू भात के नाम से भी जाना जाता है।

दूसरे दिन खरना किया जाता है। इस दिन गन्ने के रस और चावल के साथ रसिया तैयार कि जाता है। जहां गन्ने का सर नहीं मिलता है तो इसमें दूध का भी प्रयोग किया जाता है। जब छठ व्रति भोग लगा लेती हैं तो घर के बाकी सदस्यों को प्रसाद दिया जाता है। इस दिन शाम के वक्त छठ व्रति खरना का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इस वक्त इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि किसी तरह की आवाज ना हो। क्योंकि अगर छठ व्रति के कानों में किसी तरह की आवाज आ जाती है तो फिर वो उसके बाद कुछ भी खाना ग्रहण नहीं करती हैं।

इसके अगले दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

सूर्य को अर्घ्य देने के लिए छठ व्रति अपने नजदीकी नदी घाटों पर जाती हैं। कई लोग घर में ही कृत्रिम तालाब बना लेते हैं। अर्घ्य देने के दौरान छठ व्रति पूरे वक्त पानी में खड़ी रहती हैं। इसके अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन भी हो जाता है।

छठ पूजा में कई तरह के पकवान, नारियल, गन्ना, शकरकंद आदि सूर्य भगवान को अर्पित किया जाता है।

ऐसी मान्यता है कि 14 साल का बनवास खत्म करने के बाद भगवान राम ने छठ के दौरान उपवास रखा था। और सूर्य की पूजा की थी। इसी के बाद ये त्योहार मनाया जाने लगा।

एक दूसरी मान्यता ये भी है कि पांडवों को अपना राज्य वापस मिलने में छठ पूजा से मदद मिली थी।

ये भी बताया जाता है कि द्रौपदी ने भी छठ पूजा किया था।

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