CBSE स्कूल की कैंटीन में नहीं मिलेगा JUNK FOOD

CBSE स्कूल की कैंटीन में नहीं मिलेगा JUNK FOOD

JUNK FOOD खाने का वो प्रकार जो देखने में जितना आकर्षक लगता है शरीर के लिए उतना ही हनिकारक होता है। लेकिन इसके चटक स्वाद और आकर्षक सजावट की वजह से लोग इससे होनेवाले नुकसान के बारे में जातने हुए भी इसकी तरफ खींचे जले जाते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल एक या दो बार खाने के बाद लोग JUNK FOOD से दूरी बना लेते हैं। होता इसका उलटा है। एक बार अगर जीफ को JUNK FOOD का स्वाद लग जाए तो फिर इससे दूरी बनाने नामुमकिन तो नहीं लेकिन अति मुश्किल जरुर है। उम्र का कोई पैमाना नहीं है JUNK FOOD के लिए। 15 महीने के बच्चे से लेकर 15 साल के युवा और 55 साल के वयस्क तक इसके दीवाने होते हैं।

JUNK FOOD पर सीबीएसई का बड़ा फैसला

JUNK FOOD फूड से होनेवाले नुकसान को देखते हुए सीबीएसई ने एक सकारात्मक कदम उठाया है। जिसमें सीबीएसई के तहत आनेवाले तमाम स्कूलों से कहा गया है कि स्कूल की कैंटीन में JUNK FOOD पर पूरी तरीके से रोक लगा दी जाए। स्कूल के टीचर बच्चों के लंच बॉक्स को बराबर चेक करें। क्योंकि कई अभिभावक शॉर्टकट के चक्कर में अपने बच्चों को लंच बॉक्स में JUNK FOOD देकर भेजते हैं। सुबह सवेरे वक्त की कमी होने की वजह से कई अभिभावक ये शॉर्ट कट तरीका अपनाते हैं। यही नहीं सीबीएसई ने स्कूलों से कैंटीन मैनेजमेंट कमेटी बनाने की बात भी कही है। जिसमें सात सदस्य हों। जिनमें शिक्षक, अभिभावक और स्टूडेंट शामिल हों। ये कमेटी स्कूल की कैंटीन में बिकनेवाले सामानों की गुणवत्ता पर ध्यान रखें और छात्रों की फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रोग्राम तैयार करें। जिसके तहत योग, प्राणायाम, वर्जिश पर जोर दिया जाए। कुछ स्कूलों में तो इसपर अमल करने की शुरुआत भी हो चुकी है। जिसके तहत सॉफ्ट ड्रींक्स, वेफर, पैकेज्ड फूड का कैंटीन में परोसने पर रोक लगा दी गई है। सीबीएसई ने अपने निर्देश में ये भी कहा है कि हाई फैट, सॉल्ट और शूगर यानि HFSS फूड भी स्कूल की कैंटीन में नहीं परोसे जाएं।

200 मीटर के दायरे में भी नियम लागू करवाने की तैयारी

सीबीएसई ये भी तैयारी कर रहा है कि स्कूल परिसर से 200 मीटर के दायरे में सड़क किनारे भी JUNK FOOD की बिक्री पर रोक लगाई जाए। क्योंकि ये चीजें बच्चों की निगाहों से जितनी दूर रहेंगी उतना ही बेहतर होगा। दरअसल सीबीएसई की तरफ से इस तरह के फैसले लेने की पीछे खास वजह है बचपन का बीमार होना । खेलकूद में कमी और खाने की आदत की वजह से लाइफस्टाइल पूरी तरह से बिगड़ चुका है। जिसका नतीजा ये हुआ कि बच्चों में कई तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं। शरीर का वजह बढ़ रहा है। जिस उम्र में बच्चों का शरीर छरहरा होना चाहिए उस उम्र में थुलथुला शरीर लेकर घूम रहे हैं। जिसका नतीजा ये हो रहा है कि बच्चे कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। यहां तक की 8-10 साल की उम्र में बच्चे डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। जो एक चिंता की बात है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए सीबीएसई वने ये कदम उठाया है। JUNK FOOD पर रोक लगाने के साथ साथ स्कूलों से बच्चों के BMI यानि बॉडी मास इंडेक्स पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है।

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