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HC में केजरीवाल ने मानहानि केस को ‘निजी’ माना था, लेकिन अब कुछ और बता रहे हैं

HC में केजरीवाल ने मानहानि केस को ‘निजी’ माना था, लेकिन अब कुछ और बता रहे हैं

नई दिल्ली: DDCA में वित्तीय अनियमितता की बात करते हुए केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अरुण जेटली पर घोटाले का आरोप लगाया था। जिसके बाद जेटली की तरफ से केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ मानहानि का केस किया गया है।

जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ आपराधिक मानहानि के साथ साथ इसी मामले में एक दीवानी केस भी किया है। आपराधिक मानहानि केस में केजरीवाल को सजा दिलाने के लिए जेटली केस लड़ रहे हैं जबकि दीवानी मामले में हर्जाने की मांग की गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ वक्त पहले केजरीवाल ने जेटली की तरफ से दायर मानहानि केस को प्राइवेट इन कैरक्टर यानि निजी बताया था। केजरीवाल ने तब अदालत में मानहानि केस को इस आधार पर खारिज करने के लिए याचिका दायर की थी कि वह निजी है। लेकिन अदालत में उस याचिका को खारिज कर दी गई थी।

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केजरीवाल की तरफ से तब अदालत में कहा गया था ‘वर्तमान याचिका में याचिकाकर्ता की तरफ से इस आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रोकने की मांग की गई है कि इस मामले में दीवानी मुकदमा समान तथ्यों और आरोपों के आधार पर दाखिल किया गया है।‘ यह भी वजह दी गई थी कि ‘जेटली की तरफ से की गई दोनों न्यायिक कार्यवाही में समानताएं हैं। साथ ही दोने की कानूनी कार्यवाही की प्रकृति निजी है।‘

केजरीवाल की तरफ से दायर इस याचिका पर कोर्ट ने कहा था ‘ये सच है कि दोनों ही मामलों में वादी और प्रतिवादी समान हैं। लेकिन तथ्य यही है कि दोनों मामलों की प्रक्रिति अलग-अलग है। दीवानी मुकदमे में प्रतिवादी संख्या 1 (जेटली) की तरफ से अपनी प्रतिष्ठा के नुकसान का हवाला देते हुए हर्जाने की मांग की गई है। जबकि दूसरा केस आपराधिक मानहानि का है। दोनों ही केसों पर विचार करने से एक ही अपराध में किसी को दो बार सजा होने का खतरा नहीं है।‘

लेकिन अब जबकि मानहानि केस में सरकारी खजाने से वकील जेठमलानी की फीस चुकाने पर सवाल किये जा रहे हैं तो आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा जा रहा है कि जेटली पर केजरीवाल ने दिल्ली का सीएम रहते आरोप लगाए थे। इसलिए इसमें सरकार की तरफ से फीस का भुगतान किये जाने में कुछ भी गलत नहीं है।

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