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BSF जवान से पहले CAG रिपोर्ट में भी जवानों के खराब खाने की बात सामने आई थी

BSF जवान से पहले CAG रिपोर्ट में भी जवानों के खराब खाने की बात सामने आई थी




नई दिल्ली: बीएसएफ जवानों को खराब खाना की शिकायत वाला तेज बहादुर यादव के वीडियो के सामने आने के बाद गृह मंत्रालय से लेकर बीएसएफ के आला अधिकारियों तक हलचल तेज है। जो शिकायत तेज बहादुर यादव ने अपने वीडियो में किया है 2015 में सीएजी की रिपोर्ट में भी ये बात सामने आ चुकी थी कि भारत पाकिस्तान और भारत चीन सीमा पर जवानों को खराब खाना दिया जाता है।

सीएजी ने पिछले साल जो रिपोर्ट दी थी उसके मुताबिक आर्मी के सर्वे में खुलासा हुआ कि 68 फीसदी जवान खाने को संतोषजनक या फिर खराब क्वालिटी का मानते हैं। सर्वे में ये निकलकर सामने आया कि जवानों को खराब क्वालिटी का मांस और सब्जी खाने में दी जाती है। राशन की मात्रा भी काफी कम होती है और स्वाद के मुताबिक तो होता ही नहीं।

खाने की क्वालिटी में सबसे ज्यादा शिकायत उत्तरी और पूर्वी कमांड पर मिली थी। पाकिस्तान और लद्दाख से सटी चीन सीमा और अरुणाचल और सिक्किम से सटी सीमा पर। आर्मी हेडक्वार्टर के राशन की मांग को रक्षा मंत्रालय ने 23 फीसदी तक कम किया। जबकि सेना ने फील्ड में तैनात बटालियन की जरुरत के मुताबिक एस्टीमेट बनाया था।

इसकी एक वजह ये भी है कि सेना के कमांड मुख्यालय और डायरेक्टर जनरल ऑफ सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट के आंकड़ों में काफी फर्क है। कमांड मुख्यालयों ने 2014-15 में 46 हजार मिट्रिक टन दाल की मांग की थी। लेकिन डीजीएसटी ने उसे घटाकर 37 हजार मिट्रिक टन कर दिया था।

तेज बहादुर ने क्या आरोप लगाए थे उसे जानने के लिए यहां क्लिक करें
वहीं बीएसएफ जवान तेजबहादुर ने जब खराब खाने की शिकायत की तो उसके बाद तेज बहादुर को एलओसी से हटाकर उसे हेडक्वार्टर में भेज दिया गया है। तेज बहादुर को वहां प्लंबर का काम दिया गया है। इसके पीछे बताया जा रहा है कि तेज बहादुर ने अपनी ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाई थी। जबकि किसी भी जवान को ड्यूटी के वक्त मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। तेज बहादुर के आरोपों के बाद मेस कमांडर को छुट्टी पर भेज दिया गया है।

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